किसानों से जुड़े तीन अध्यादेश और उन्हीं से अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े बैंकिंग प्रणाली से संबंधित चौथे अध्यादेश के विरोध में विपक्षी दल खड़े हो गए हैं। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने इन अध्यादेशों के विरोध में संसद भवन के सामने सोमवार को 'हल्लाबोल' का आह्वान किया था। हालांकि किसानों को दिल्ली में प्रवेश नहीं करने दिया गया। किसानों के प्रतिनिधि एवं प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी ने यह कह कर इन अध्यादेशों का विरोध किया है कि इनसे किसानों की फसल खरीद से लेकर उनका बैंकिंग सिस्टम भी तबाह हो जाएगा।
वजह, इन जगहों पर बड़े कारोबारी अपना कब्जा जमा लेंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश कहते हैं कि नए कानून का असल फायदा, तो निजी कंपनियां उठाएंगी। खेती-किसानी के साथ अब कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग और कॉर्पोरेट फार्मिंग जैसे नए शब्द जुड़ जाएंगे। पचास वर्षों से चली आ रही न्यूनतम समर्थन मूल्य की प्रणाली खत्म हो जाएगी। फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, जैसी संस्थाओं का अस्तित्व खतरे में होगा।
बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में जो संशोधन किया जा रहा है, उसके तहत सारे बैंकों का नियमन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के हाथ में चला जाएगा। कॉपरेटिव बैंक की सदस्यता में बदलाव लाया जा रहा है। जो किसान नहीं है, उन्हें भी इन बैंकों में शेयर मिल सकता है। यानी हर जगह पर बड़े कारोबारी आकर बैठ जाएंगे।
जयराम रमेश का कहना है कि कृषि संबंधित तीनों अध्यादेश किसानों के हित में नहीं हैं। यही वजह है कि किसान संगठन भी इनका विरोध कर रहे हैं। इससे पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और दूसरे राज्यों के राजस्व पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा। जहां तक लाभ की बात है तो वह केवल निजी कंपनियों को होगा।
एमएसपी की प्रणाली, जिसका किसान को सदैव इंतजार रहता है, वह अब खत्म हो जाएगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए अनाज खरीदने वाली संस्थाएं जैसे भारतीय खाद्य निगम का भी अस्तित्व नहीं बचेगा। केंद्र सरकार, एमएसपी और सरकारी खरीद, जो हमारे खाद्य सुरक्षा के स्तंभ हैं, उन्हें कमजोर बनाने पर तुली है। ये किसी भी तरह से किसानों के हित में नहीं हैं।
बतौर जयराम रमेश, केंद्र सरकार ने इस बाबत राज्य सरकारों के साथ कोई विचार-विमर्श नहीं किया। कृषि तो राज्य सूची का विषय है। कृषि संबंधित अध्यादेश के बारे में अफसरों के स्तर पर या मंत्रियों के स्तर पर कोई विचार-विमर्श नहीं हुआ। एकाएक ये अध्यादेश थोप दिए गए।
सहकारी बैंकों में घुस सकेंगे कारोबारी ...
वित्त मंत्रालय से संबंधित बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में भी अध्यादेश के जरिए जो संशोधन किया जा रहा है, वह भी गलत है। मौजूदा व्यवस्था में बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत देश के सहकारी बैंक, राज्य सरकारों के नियमों के अनुसार संचालित होते हैं। अब इन बैंकों का नियमन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया करेगा। इससे कॉपरेटिव बैंक की सदस्यता में भी बदलाव लाया जाएगा। जो लोग किसान नहीं हैं, उन्हें कॉपरेटिव बैंक के सदस्य बनाया जाएगा। हो सकता है कि बाहर के लोगों को बड़ा शेयर भी इन बैंकों में मिल जाए। केंद्र का ये अध्यादेश भी राज्यों के खिलाफ है।सर्वविदित है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की निगरानी वाले अनेक बैंक बंद हो गए हैं।