शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि पुरी का जगन्नाथ धाम आध्यात्मिक खोज का स्थान है न कि मनोरंजन का। पुरी का समुद्र तट भजन, कीर्तन और धार्मिक प्रवचनों के लिए समर्पित होना चाहिए।
गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने पुरी-कोणार्क समुद्र तट पर पर्यटकों के लिए झोपड़ियां स्थापित करने के ओडिशा सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया। इस दौरान जगन्नाथ मंदिर के पास 40 सामाजिक संगठनों ने शंकराचार्य का समर्थन करते हुए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान तीर्थ स्थल और समुद्र तट पर शराब प्रतिबंधित करने की मांग भी की गई।
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शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि पुरी का जगन्नाथ धाम आध्यात्मिक खोज का स्थान है न कि मनोरंजन का। पुरी का समुद्र तट भजन, कीर्तन और धार्मिक प्रवचनों के लिए समर्पित होना चाहिए। इसे आनंद-प्राप्ति और मौज-मस्ती की जगह के रूप में न बदला जाए।
समुद्र तट पर शराब की अनुमति के प्रस्ताव को लेकर शंकराचार्य ने कहा कि समुद्र तट पर शराब का सेवन तीर्थ क्षेत्र की आध्यात्मिक पवित्रता को नुकसान पहुंचाएगा। साथ ही जगन्नाथ की संस्कृति को बदनाम करेगा। दुनिया भर से लोग पुरी में श्रद्धालु के तौर पर आते हैं, न कि पर्यटक के तौर पर। पुरी समुद्र तट को महोदधि भी कहा जाता है। इसका आध्यात्मिक अर्थ है और यह धार्मिक गतिविधियों के लिए है। पुरी में लोग समुद्र तट पर महोदधि आरती भी करते हैं।
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उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के सभी अनुयायियों को इसका विरोध करना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से प्रस्ताव को वापस लेने की अपील की। वहीं प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पुरी सागर को देवी लक्ष्मी का मायका माना जाता है और श्री नारायण हर अमावस्या के दिन वहां आते हैं। समुद्र तट पर शराब की बिक्री बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शंकराचार्य ने 2021 में पिछली बीजेडी सरकार के इसी तरह के प्रस्ताव का विरोध किया था। जिसे सरकार ने लागू नहीं किया था।
सरकार की इस नीति का उद्देश्य राजस्व बढ़ाने के लिए गोवा की तरह पुरी और कोणार्क समुद्र तटों पर पर्यटकों का मनोरंजन प्रदान करना है। इसका लोग और संत विरोध कर रहे हैं।