भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के तहत नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सेना की इस कार्रवाई को कई आतंकी घटनाओं का जवाब माना जा रहा है। पाकिस्तानी कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (POJK) के मुजफ्फराबाद और पाकिस्तान के मुरीदके में मुंबई आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब, डेविड हेडली और उसके 9 साथियों को आतंकी प्रशिक्षण दिया गया था।
भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के खिलाफ पहलगाम आतंकवादी हमले के साथ ही मुंबई के गुनहगारों का भी हिसाब चुकता कर दिया है। पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद और लाहौर के करीब मुरीदके में ध्वस्त हुए आतंकवादी कैंपों में मुंबई के 26-11 को लहूलुहान करने वाले आतंकियों को भी प्रशिक्षण दिया गया था। साल 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले में एकमात्र जीवित पकड़े गए आतंकवादी अजमल कसाब ने विशेष अदालत को दिए इकबालिया बयान में इसका खुलासा किया था।
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आतंक का सरगना हाफिज सईद...
मुंबई में हुए 26-11 के आतंकी हमले पर दिए इकबालिया बयान में अजमल कसाब ने कबूल किया था कि उसे और मुंबई पर हमला करने वाले उसके साथ आए अन्य 9 साथियों को पीओके के मुजफ्फराबाद और मुरीदके (लश्कर-ए-तैयबा मुख्यालय) में प्रशिक्षण दिया गया था। आतंकियों की ट्रेनिंग को परखने के लिए पाकिस्तानी सेना के अधिकारी के साथ आतंक का सरगना हाफिज सईद भी वहां पहुंचा था।
खुफिया एजेंसी आईएसआई और सेना के समर्थन से आतंकवाद
मुरीदके का मरकज कैंप लश्कर ए तैयबा का पुराना ठिकाना है। इसी कैंप में अजमल कसाब और उसके 9 साथियों के साथ डेविड हेडली ने भी ट्रेनिंग ली थी। मुंबई में हुए 26-11 हमला मामले में सरकारी वकील रहे उज्वल निकम ने बताया कि 12 मार्च 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के भी तार इन आतंकी ठिकानों से जुड़े रहे हें जिसे भारतीय वायु सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत इस कैंप को नेस्तनाबूद कर दिया है। निकम ने कहा कि पीओके सहित पाकिस्तान के आतंकवादी अड्डे वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई और सेना के समर्थन से चलाया जा रहा था।
पीओके के आतंकी कैंपों में दिए जाते थे पांच स्तरीय प्रशिक्षण
पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) सहित पाकिस्तान के अन्य आतंकवादी कैंपों में तैयार किए जाने वाले दहशतगर्दों को पांच स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाते थे। इसका खुलासा खुद आतंकवादी अजमल कसाब ने किया था। उसने कबूल किया था मुंबई पर हमला करने के लिए उसे और उसके साथियों को दौरा-ए-सूफा, दौरा-ए-एम्मा, दौरा-ए-खासा और दौरा-ए रिबास की ट्रेनिंग दी गई थी। अधिवक्ता उज्वल निकम ने बताया कि दौरा-ए-रिबास में यह सिखाया जाता था कि सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देकर कैसे हमला करना है। इन कैंपों में पाकिस्तानी सेना के अधिकारी आतंकवादियों को ट्रेनिंग देते थे।
निजी टेलीकॉम कंपनियों को कनेक्टिविटी सुधारनी होगी
दूरसंचार विभाग ने अपने आदेश में सभी प्राइवेट और निजी टेलीकॉम कंपनियों को अपने कनेक्टिविटी सुधारने की बात कही है। इसके लिए कंपनियों को आपस में मिल कर काम करने को भी कहा गया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई बैठक में टेलिकॉम कंपनियों को बॉर्डर के इलाकों में नेटवर्क कनेक्टिविटी पर खासा ध्यान देने को कहा गया है। इसके अलावा इन कंपनियों को उन जगहों की लिस्ट बनाने के लिए भी कहा गया है जिन्हें आपात स्थिति में हर हाल में चालू रखा जा सके।