बिहार की प्रसिद्ध मीठी और रसीली लीची को देश के प्रमुख शहरों तक ताजा पहुंचाने के लिए रेलवे ने बड़ी योजना की शुरुआत की है। पहली बार मुजफ्फरपुर और मुंबई के बीच लीची स्पेशल ट्रेन शुरू होने जा रही है। 15 मई से चलने वाली पार्सल सह यात्री स्पेशल ट्रेन में 16 कोच लगाए जाएंगे। यह स्पेशल ट्रेन प्रत्येक दिन शाम पांच बजे मुजफ्फरपुर से मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस के लिए रवाना होगी।
किसानों और व्यापारियों को लीची लोडिंग के लिए पर्याप्त समय मिलेगा
सोनपुर के सीनियर डीसीएम रोशन कुमार का कहना है कि, मुजफ्फरपुर से मुंबई के लिए लीची स्पेशल ट्रेन चलेगी। इसमें यात्रियों के लिए एसी, स्लीपर और जनरल कोच भी लगे होंगे। जबकि मुंबई के लिए पहली बार एक माह के लिए लीची स्पेशल ट्रेन चलेगी। सोनपुर रेल मंडल ने ट्रेन के परिचालन की तैयारी पूरी कर ली है। इस ट्रेन में 23 टन की क्षमता वाले छह पार्सल वैन के अलावा पांच स्लीपर, दो एसी और तीन जनरल बोगियां होंगी। स्पेशल ट्रेन चूंकि मुजफ्फरपुर से ही चल रही है, इससे किसानों और व्यापारियों को लीची लोडिंग के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। बुकिंग के लिए जंक्शन स्थित रनिंग रूम के पास डेडिकेटेड केंद्र खुलेगा। जबकि लीची के कार्टन को एक्स-रे जांच मशीन से नहीं गुजरना होगा। पिछले वर्ष मुजफ्फरपुर जंक्शन से अलग-अलग शहरों में जाने के लिए 6.5 हजार क्विंटल लीची लोडिंग हुई थी।
पिछले वर्ष केवल 689 टन लीची का परिवहन
दरअसल, पूर्वोत्तर रेलवे के सोनपुर मंडल द्वारा शुरू की गई इस अभिनव पहल के अंतर्गत अब पवन एक्सप्रेस के साथ-साथ छह अतिरिक्त मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में भी 24 टन क्षमता वाले पार्सल वैन जोड़ा गया है। जिससे लीची का परिवहन तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो सकेगा। मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और आसपास के क्षेत्रों से उत्पादित लीची अब सीधे मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद जैसे बड़े बाजारों तक भेजी जाएगी। पिछले वर्ष गर्मी और कम उत्पादन के कारण केवल 689 टन लीची का परिवहन हो सका था, लेकिन इस वर्ष रेलवे ने 2100 टन लीची भेजने का लक्ष्य रखा है। यह किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के साथ उपभोक्ताओं को भी ताजा और स्वादिष्ट फल उपलब्ध कराने में सहायक होगा।
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प्रत्येक सोमवार लीची भेजी जाएगी
पहले केवल पवन एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 11062) से लीची भेजी जाती थी, अब छह अन्य ट्रेनों में भी पार्सल वैन जोड़ दिया गया है। इनमें से प्रत्येक ट्रेन से प्रति सप्ताह 24 टन लीची भेजी जाएगी।अब 15267 (रक्सौल–एलटीटी) से प्रत्येक शनिवार, 22553 (रक्सौल–एलटीटी अंत्योदय) से प्रत्येक सोमवार, 05557 (रक्सौल–एलटीटी) से प्रत्येक मंगलवार, 05585 (रक्सौल–एलटीटी) से प्रत्येक शुक्रवार, 01044 (समस्तीपुर–एलटीटी)से प्रत्येक बुधवार और 05289 (मुजफ्फरपुर–पुणे) से प्रत्येक सोमवार लीची भेजी जाएगी।इन छह ट्रेनों से कुल 576 टन लीची भेजने की व्यवस्था की गई है।
भारत के कुल लीची उत्पादन का 42 फीसदी हिस्सा बिहार में
वहीं, पवन एक्सप्रेस से 31 दिनों तक प्रतिदिन 24 टन लीची लदान कर कुल 744 टन लीची मुंबई भेजी जाएगी। इसके अलावा, बाकी ट्रेनों से दिल्ली और अहमदाबाद जैसे अन्य शहरों के लिए भी लीची भेजी जाएगी, जिससे कुल मिलाकर 2100 टन लीची देशभर में पहुंचाई जाएगी। देश में कुल लीची उत्पादन का 42 फीसदी हिस्सा बिहार में होता है। राज्य के 26 जिलों में 32 हजार हेक्टेयर में लीची को खेती होती है। वहीं, लीची की खेती के कुल रकबा में 60 फीसदी हिस्सा शाही लीची का है।
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बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती
रेलवे का कहना है कि, इस योजना से एक ओर जहां लीची उत्पादक किसानों को देश के बड़े बाजारों तक सीधी पहुंच मिलेगी और उनकी आमदनी में वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को भी बिहार की प्रसिद्ध लीची ताजा और उचित मूल्य पर उपलब्ध हो सकेगी।यह पहल न केवल बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी, बल्कि कृषि परिवहन के क्षेत्र में भी एक नई दिशा प्रदान करेगी।
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