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Congress: 'तथ्य तो तथ्य हैं और आपकी पसंद के कारण गायब नहीं होंगे', ऑपरेशन सिंदूर के बाद कांग्रेस ने कहा

Tue, 27 May 2025 07:15 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ऑपरेशन सिंदूर के बाद कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार से कई सवाल पूछे हैं। पवन खेड़ा ने पंडित नेहरू द्वारा कही गई बात का उल्लेख करते हुए कहा, 'तथ्य तो तथ्य हैं और आपकी पसंद के कारण गायब नहीं होंगे'।
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पवन खेड़ा, नेता, कांग्रेस - फोटो : ANI
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विस्तार
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार पर सवालों की झड़ी लगा दी है। मंगलवार को एक प्रेसवार्ता में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने पंडित नेहरू द्वारा कही गई बात का उल्लेख करते हुए कहा, 'तथ्य तो तथ्य हैं और आपकी पसंद के कारण गायब नहीं होंगे'। भाजपा के नेतृत्व को यह समझना चाहिए कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, तथ्य यह है कि कांग्रेस देश के साथ खड़ी थी, जबकि भाजपा अपने लिए खड़ी थी। बतौर पवन खेड़ा, मोदी सरकार की विध्वंसकारी विदेश नीति और युद्ध विराम के बाद की कहानी के हालिया नतीजे अब भारत में भी देखे जा रहे हैं।
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1. कुवैत में 10 लाख से ज़्यादा भारतीय नागरिक काम कर रहे हैं। कुवैत की कुल आबादी में भारतीय 21% और कुल कार्यबल में 30% हैं। आज, कुवैत ने पाकिस्तानी नागरिकों को वीज़ा जारी करना फिर से शुरू कर दिया है। खेड़ा ने कहा, गल्फ न्यूज के अनुसार, कुवैत और पाकिस्तान मज़दूरों की आवाजाही और सहयोग को और बेहतर बनाने के लिए श्रम समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने के अंतिम चरण में हैं। इसलिए दुनिया की नज़रों में अब भारत और पाकिस्तान एक दूसरे से अलग हो गए हैं।

2. इसी तरह, मोदी सरकार की किसी भी विदेश नीति की कमी की वजह से, पाकिस्तान अब यूएई की 5-वर्षीय मल्टीपल-एंट्री टूरिस्ट वीज़ा सूची में भारत के साथ शामिल हो गया है। पहले ऐसा नहीं था। पहले, सुरक्षा चिंताओं के कारण यूएई की यात्रा करने वाले सभी पाकिस्तानियों को पुलिस सत्यापन से गुजरना पड़ता था। लेकिन दुनिया अब पाकिस्तान के दुष्ट देश में एक राष्ट्र को देख रही है। वैश्विक आतंक का कारखाना अब अछूत नहीं रहा। न ही यह एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में है। 
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डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के प्रयासों के कारण, पाकिस्तान को 2008 में एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल किया गया था। यह भाजपा की विफल विदेश नीति और कांग्रेस पार्टी की विदेश नीति के बीच का अंतर है जिसने पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया। भाजपा अपने बारे में है, कांग्रेस देश के बारे में है। भारत आतंक का शिकार है और पाकिस्तान आतंक का अपराधी है। वे एक साथ नहीं चल सकते, लेकिन इस जोड़ को खारिज करने के बजाय, भाजपा नेता राजनीति कर रहे हैं।

3. पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद की घटनाओं पर कांग्रेस और भाजपा की प्रतिक्रिया में नीयत, इरादे और ईमानदारी का बुनियादी अंतर है। जहां भाजपा ने हमारे सशस्त्र बलों की वीरता की आड़ में राजनीति की और उनके नेताओं ने उनका अपमान किया, वहीं कांग्रेस पार्टी हमारे सशस्त्र बलों के साथ और राष्ट्रीय हित में मजबूती से खड़ी रही। विदेश भेजे गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों में शामिल कांग्रेस के नेता जहां एक ओर भारत के लिए खुलकर और सामूहिक रूप से बोल रहे हैं, वहीं निशिकांत दुबे जैसे भाजपा सांसद, जो इन प्रतिनिधिमंडलों का हिस्सा हैं, बेशर्मी से पक्षपातपूर्ण राजनीति कर रहे हैं और अपने ट्वीट और बयानों के जरिए ओछी और घिनौनी राजनीति के लिए झूठ फैला रहे हैं।

4. 22 अप्रैल 2025 को ही - नृशंस पहलगाम नरसंहार के दिन, कांग्रेस पार्टी ने इस कायरतापूर्ण कृत्य की कड़ी निंदा की और माननीय कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि "राष्ट्रीय सुरक्षा महत्वपूर्ण है", साथ ही उन्होंने "भारत सरकार से इसे सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक कदम उठाने" का आग्रह किया। दूसरी ओर, भाजपा ने अपने सोशल मीडिया पर अब कुख्यात “धर्म पूछा, जात नहीं” के कॉर्टून के ज़रिए राजनीति करना शुरू कर दिया। पीड़ितों को सांत्वना देने के बजाय, भाजपा ने आतंकी हमले का बेशर्मी से सांप्रदायिकरण किया। उन्होंने हमारे नेता श्री राहुल गांधी की चल रही अमेरिका यात्रा को भी पहलगाम आतंकी हमले से जोड़ दिया, जबकि हमारे नेता अपनी यात्रा बीच में ही छोड़कर वापस आ गए।

5. उसी दिन, कांग्रेस पार्टी ने सर्वदलीय बैठक की मांग की, क्योंकि इस हमले का “प्रभावी ढंग से जवाब दिया जाना चाहिए”। सर्वदलीय बैठक 25 अप्रैल को हुई, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी बैठक में शामिल नहीं हुए और चुनावों को प्राथमिकता देते हुए उसी दिन चुनाव प्रचार करने बिहार चले गए। कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में पूरे विपक्ष ने हमले के बाद सरकार के हर कदम का समर्थन किया। बतौर पवन खेड़ा, मोदी जी पहलगाम पीड़ितों के परिवारों से मिलने नहीं गए, बल्कि जम्मू-कश्मीर जाने के बजाय चुनाव प्रचार के लिए बिहार चले गए। इसके विपरीत राहुल गांधी की प्रतिक्रिया देखें तो वे 25 अप्रैल को श्रीनगर गए, घायलों से मिले और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और कई हितधारकों से मिले। उसी दिन वे पहलगाम के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस पार्टी की मोमबत्ती जुलूस में भी शामिल हुए।

6. 26 अप्रैल को जब देश के दिलों और दिमाग में पहलगाम के पीड़ितों की चिताएं जल रही थीं, तब वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने एक घिनौनी टिप्पणी की, जिसमें 140 करोड़ भारतीयों की देशभक्ति को आश्चर्यजनक रूप से दोषी ठहराया गया। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने सरकार से पाकिस्तान को कड़ा और बेबाक जवाब देने का आग्रह किया। पवन खेड़ा ने कहा, जब मोदी जी मुंबई में फिल्मी सितारों के साथ जश्न मना रहे थे, ऐसा लगा कि वे पहलगाम के भीषण आतंकी हमले को भूल गए हों। उसी के एक दिन पहले, 30 अप्रैल को, राहुल गांधी पहलगाम के पीड़ित शुभम द्विवेदी के परिवार से मिलने कानपुर गए, जहाँ उन्होंने उनके परिवार की मांग को उठाने का वादा किया कि सभी पीड़ितों को शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए। 1 मई को, उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह सार्वजनिक मांग की, जहाँ उन्होंने यह भी कहा कि हमें पहलगाम हमले के लिए एक मजबूत जवाब की आवश्यकता है।

7. सात मई को, हमारे भारतीय सशस्त्र बलों के बहादुर और साहसी प्रयासों को जानने के बाद, कांग्रेस अध्यक्ष ने हमारे सशस्त्र बलों के साथ एकजुटता व्यक्त की और कहा कि “राष्ट्रीय एकता और एकजुटता समय की मांग है”। कांग्रेस पार्टी ने तुरंत हमारे सशस्त्र बलों के दृढ़ संकल्प की प्रशंसा करने और ऑपरेशन सिंदूर के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए सीडब्लूसी की बैठक बुलाई। राहुल गांधी ने ‘हमारी सेना के प्रति प्रेम’ व्यक्त किया। राष्ट्र की एकता के रुख के साथ भाजपा की असहमति एक बार फिर दिखाई दी, जब भाजपा के आधिकारिक ट्विटर (X) हैंडल ने ऑपरेशन सिंदूर पर तीसरे दर्जे की राजनीति करते हुए हास्यास्पद वीडियो पोस्ट किया। इसने हमें दिल्ली चुनाव के लिए भाजपा द्वारा जारी किए गए रक्तरंजित विज्ञापनों और 26/11 के बाद मुंबई में मोदी जी की शर्मनाक प्रेस कॉन्फ्रेंस की याद दिला दी। आतंकवाद पर राजनीति करना भाजपा के डीएनए में है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भाजपा यह सब तब कर रही थी, जब हमारे बहादुर सशस्त्र बल दुश्मन के ड्रोन को नाकाम कर रहे थे और सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी तोपखाने की गोलाबारी का जवाब दे रहे थे। जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में कम से कम 23 लोग मारे गए। जबकि पाकिस्तान ने हमारे धार्मिक स्थलों, स्कूलों, घरों को निशाना बनाया - इतिहास को याद रखना चाहिए कि भाजपा राजनीति कर रही थी।

8. जब भाजपा पहलगाम हमले को अंजाम देकर उन लोगों के हाथों में खेल रही थी जो हमें विभाजित करना चाहते थे, कांग्रेस ने 9 मई को दिल्ली में 'जय हिंद यात्रा' निकाली, जिसमें कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने तिरंगा लेकर मार्च किया। दूसरी ओर, भाजपा ने शहीद नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की विधवा के खिलाफ एक संगठित अभियान शुरू किया। उनकी पत्नी हिमांशी नरवाल को खूब ट्रोल किया गया। जब आईटी सेल उनके चरित्र हनन में व्यस्त था, तब हमारे नेता राहुल गांधी 9 मई को उनसे और शहीद के परिवार से मिलने हरियाणा के करनाल गए। भाजपा की नफरत फैलाने वाली नीतियों और कांग्रेस पार्टी के सद्भाव व सांत्वना के बीच कितना बड़ा अंतर है। भाजपा के सदस्यों और फ्रिंज ग्रुप ने हैदराबाद में कराची बेकरी आउटलेट्स में तोड़फोड़ की, और हमारी तेलंगाना सरकार ने सख्त कानूनी कार्रवाई की, वहीं कांग्रेस पार्टी सभी जिलों में पहलगाम पीड़ितों की याद में मोमबत्ती जलाकर जुलूस निकाल रही थी।

9. मोदी सरकार, पहले तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के "युद्धविराम" ट्वीट से थोड़ी सकपकाई, जिसमें भारत सरकार द्वारा सहमत संघर्ष विराम का श्रेय लिया गया था। अगर यह पर्याप्त नहीं था, तो उनके विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान को एक 'तटस्थ स्थल' पर शांति वार्ता की तैयारी करनी चाहिए। इसके बाद, 11 दिनों में, श्री ट्रम्प ने कम से कम 8 बार दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने का दावा किया। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार भारत के लिए इसे स्वीकार करने का एक ज़रिया है। उन्होंने एक ही सांस में भारत और पाकिस्तान को एक साथ जोड़ दिया और ऐसा करना जारी रखा। इस पर, हमारे विदेश मंत्री की एकमात्र प्रतिक्रिया - उन्होंने कहा कि "अमेरिका अमेरिका में था" - एक साक्षात्कार में एक गंभीर सवाल का एक अशिष्ट जवाब। युद्ध विराम के अचानक आह्वान और विदेश सचिव विक्रम मिस्री द्वारा औपचारिक घोषणा ने भाजपा - इसके आईटी सेल, डर्टी ट्रिक्स विभाग ने हमारे ही विदेश सचिव की तीखी आलोचना की। उन्हें बड़े पैमाने पर ट्रोल किया गया; उनकी बेटी का पता लगाया गया और तंग किया गया। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री स्पष्ट रूप से चुप रहे। कांग्रेस पार्टी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई।

10. अगर यह पर्याप्त नहीं था, तो मध्य प्रदेश में भाजपा के कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ सबसे घृणित और गंदी टिप्पणी की। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय को स्वत: संज्ञान से एसआईटी का आदेश देना पड़ा, लेकिन भाजपा का नेतृत्व चुप रहा। कोई कार्रवाई करने के बजाय, ऐसा लगता है कि वे इसको हवा देना जारी रखते रहे। मध्य प्रदेश में भाजपा के उपमुख्यमंत्री ने हमारी सेना को बदनाम करने वाली ऐसी ही टिप्पणी की और हरियाणा से भाजपा के राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा ने पहलगाम पीड़ितों की पत्नियों की वीरता पर सवाल उठाया। इस पर किसी भी वरिष्ठ भाजपा नेता द्वारा कोई कार्रवाई, कोई शब्द या कोई निंदा नहीं की गई।

11. भाजपा ने राहुल गांधी के ट्रम्प के हस्तक्षेप, भारत और पाकिस्तान को एक साथ जोड़ने तथा हमारी प्रतिक्रिया के बाद वाले नैरेटिव में किसी भी देश द्वारा हमारा समर्थन न करने के बारे में वैध प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया। कांग्रेस पार्टी हमारे सशस्त्र बलों का सम्मान करते हुए ‘जय हिंद’ सभा कर रही है तथा मोदी सरकार से प्रासंगिक और महत्वपूर्ण प्रश्न पूछ रही है। इसके बजाय, भाजपा नेता कांग्रेस पार्टी के खिलाफ झूठ फैलाने के लिए इतिहास खंगालने में व्यस्त हैं। राहुल गांधी ने 24 मई को सीमा पार से गोलाबारी के पीड़ितों से मिलने के लिए फिर से पुंछ का दौरा किया। जबकि पहलगाम हमले के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर में कदम नहीं रखा है। वे हमारे सशस्त्र बलों की वीरता का व्यक्तिगत श्रेय लेने के लिए फिल्मी डायलॉगबाज़ी बोलते हुए सार्वजनिक रैलियां करने में व्यस्त हैं। पवन खेड़ा ने आखिर में कहा, पंडित नेहरू ने कहा था, “तथ्य तो तथ्य हैं और आपके पसंद के कारण गायब नहीं होंगे” – भाजपा के नेतृत्व को यह समझना चाहिए कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, तथ्य यह है कि कांग्रेस देश के साथ खड़ी थी, जबकि भाजपा अपने लिए खड़ी थी।
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