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रिपोर्ट: दुनिया में हर सात में एक व्यक्ति मानसिक बीमारियों से जूझ रहा, युवाओं में आत्महत्या बढ़ी चिंता का कारण

Thu, 04 Sep 2025 05:38 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डब्ल्यूएचओ की नई रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में दुनिया की सात में से एक आबादी, यानी एक अरब से अधिक लोग मानसिक बीमारियों से ग्रस्त थे। इनमें से दो-तिहाई मामले चिंता और अवसाद के थे। मानसिक समस्याओं का युवाओं पर सबसे गंभीर असर पड़ा है। आत्महत्या युवाओं में मौत का बड़ा कारण बन चुकी है, और हर आत्महत्या के पीछे लगभग 20 नाकाम कोशिशें होती हैं।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : FreePik
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विस्तार
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी नई रिपोर्ट में खुलासा किया है कि वर्ष 2021 में दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा मानसिक बीमारियों से जूझ रहा था। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया की सात में से एक आबादी यानी एक अरब से अधिक लोग मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों से प्रभावित थे। इनमें से दो-तिहाई मामले चिंता व अवसाद के थे।
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रिपोर्ट 'वर्ल्ड मेंटल हेल्थ टुडे' और 'मेंटल हेल्थ एटलस 2024' के अनुसार, मानसिक बीमारियों के कारण युवाओं पर गंभीर असर पड़ा है। आत्महत्या युवाओं में मौत का एक प्रमुख कारण है और यह विश्व स्तर पर हर 100 मौतों में से एक से अधिक के लिए जिम्मेदार है। चिंताजनक बात यह है कि हर आत्महत्या के पीछे लगभग 20 प्रयास किए जाते हैं।

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शोधकर्ताओं ने कहा, स्किजोफ्रेनिया और बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी बीमारियां भी तेजी से सामने आ रही हैं। अनुमान है कि हर 200 में एक वयस्क स्किजोफ्रेनिया और हर 150 में एक बाइपोलर डिसऑर्डर से प्रभावित है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि स्किजोफ्रेनिया सबसे बाधित करने वाली और समाज पर सबसे अधिक लागत डालने वाली बीमारी है। इसमें रोगी अक्सर भ्रम (हॉलुसिनेशन) और अव्यवस्थित सोच जैसी समस्याओं का सामना करते हैं। 
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तो मानसिक स्वास्थ्य संकट और गहरा हो सकता है...
डब्ल्यूएचओ प्रमुख डॉ. टेड्रोस एडनोम घेब्रेयसस ने कहा, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को बदलना आज दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। हर सरकार की जिम्मेदारी है कि मानसिक स्वास्थ्य को विशेषाधिकार नहीं बल्कि एक बुनियादी अधिकार माना जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तुरंत निवेश, बेहतर सेवाएं और कानूनी सुधार नहीं किए गए, तो मानसिक स्वास्थ्य संकट और गहरा हो सकता है।
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