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चिंताजनक: गांवों में बढ़ा कैंसर का खतरा, हर लाख पर 93 पुरुष, 84 महिलाएं पीड़ित; कई जिलों में हालात गंभीर

Thu, 04 Sep 2025 05:18 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क

सार

ग्रामीण भारत में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 2012-2019 के बीच 7 लाख से ज्यादा नए मामलों के विश्लेषण में सामने आया कि प्रति एक लाख ग्रामीणों में औसतन 93 पुरुष और 84 महिलाएं कैंसर से पीड़ित हैं। जामा नेटवर्क ओपेन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, कुल मामलों में 54% महिलाएं रहीं और रोगियों की औसत उम्र 56 वर्ष रही।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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कैंसर अब न सिर्फ शहरी बल्कि ग्रामीण भारत में भी तेजी से बढ़ रहा है और कई क्षेत्रों में यह शहरों से भी अधिक गंभीर रूप ले चुका है। 50 फीसदी से अधिक ग्रामीण इलाकों में प्रति एक लाख में औसत 93 पुरुष और 84 महिलाएं कैंसर से पीड़ित पाई गईं। जामा नेटवर्क ओपेन में प्रकाशित अध्ययन के तहत 2012 से 2019 के बीच दर्ज 7,08,223 नए कैंसर मामलों और 2,06,457 मौतों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन बताता है कि कुल मरीजों में लगभग 54 फीसदी महिलाएं थीं और रोगियों की औसत उम्र 56 वर्ष रही।
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कुल 43 कैंसर रजिस्ट्री में से 21 ऐसे क्षेत्र चुने गए जहां ग्रामीण आबादी 50% या उससे अधिक है। इन जिलों का औसत क्रूड इंसीडेंस रेट (सीआईआर)  यानी हर एक लाख पर नए मामलों की संख्या  पुरुषों में 93 और महिलाओं में 84 पाई गई। यह आंकड़े संपूर्ण ग्रामीण भारत का परिदृश्य नहीं दर्शाते बल्कि केवल उन्हीं क्षेत्रों का औसत हैं जहां रजिस्ट्री कवरेज मौजूद है।

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सीआईआर दरअसल किसी क्षेत्र में कैंसर के बोझ को समझने का सरल पैमाना है। उदाहरण के लिए यदि 10 लाख की आबादी वाले किसी क्षेत्र में एक साल में 1,000 नए मामले सामने आए तो सीआईआर 100 होगा। अध्ययन भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अधीन राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के 43 जनसंख्या-आधारित कैंसर रजिस्ट्री (पीबीसीआर) के आंकड़ों पर आधारित है।
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यहां स्थिति गंभीर
शोध के मुताबिक, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के कई जिले सबसे गंभीर स्थिति में हैं। केरल के पथानामथिट्टा में ग्रामीण आबादी 89% है। यहां पुरुषों में सीआईआर 260.9 और महिलाओं में 209.4 प्रति लाख दर्ज हुआ, जो अधिकांश शहरी क्षेत्रों से भी ज्यादा है। अलप्पुझा, कोल्लम और तिरुवनंतपुरम जैसे जिले भी उच्च दर पर हैं। मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स में पुरुषों का सीआईआर 139.5 और महिलाओं का 84.6 है। असम का काछार जिला (81.8% आबादी) पुरुषों में सीआईआर 106.6 और महिलाओं में 96.5 दर्ज करता है। उत्तर भारत में वाराणसी (62.5% आबादी) में पुरुषों का सीआईआर 98.4 और महिलाओं का 89.3 पाया गया।

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