प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत राज्यों को उपल्बध कराए गए धन को वे खर्च नहीं कर पा रहे हैं। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी दी है। अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि मंत्रालय के प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) के तहत राज्यों को दिए गए रुपयों में से करीब 4500 करोड़ रुपये राज्यों के पास अभी भी रखे हुए हैं। वे इन निधियों का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने कहा कि जब तक राज्य सरकारें इन निधियों का उपयोग नहीं करती हैं और 'उपयोगिता प्रमाण पत्र' पेश नहीं करती हैं, तब तक केंद्र के लिए योजना के तहत उन्हें और अधिक धन उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के तहत 58,000 से अधिक इकाइयां ऐसी थीं, जोकि 2008 से 2018-2019 तक प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम का हिस्सा थीं। इन इकाइयों को राज्यों ने अव्यवहारिक बताया था। इसके बाद अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा राज्यों से बात करने के बाद इन समितियों को रद्द कर दिया गया है।
मोदी सरकार ने नौ सालों में अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए खर्चे 31,000 करोड़ रुपये
अधिकारियों ने यह कहा कि यूपीए शासन के दौरान अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए लगभग 12,000 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई थी। वहीं, नरेंद्र मोदी सरकार के नौ सालों में इस उद्देश्य के लिए 31,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
क्या है PMJVK?
बता दें कि PMJV केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित एक योजना है। इस योजना के तहत क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां सामुदायिक बुनियादी ढांचे और बुनियादी सुविधाओं का निर्माण कराया जा रहा है। जिससे बुनियादी ढांचे का लाभ उस इलाके में रहने वाले सभी लोगों को मिल सके। इस योजना को मई 2018 से प्रधानमंत्री जन विकास कार्यकम (पीएमजेवीके) के रूप में पुनर्गठित किया गया था। इस योजना का उद्देश्य देश के 1300 चिन्हित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक मापदंडों में अंतर को कम करना था।