जीएसटी की जांच के दौरान अधिकारी किसी को भी टैक्स जमा करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते हैं। अधिकारियों के खिलाफ मिली शिकायतों के बाद जीएसटी जांच कार्यालय ने यह स्पष्टीकरण जारी किया है। जीएसटी जांच कार्यालय ने साफ किया है कि कोई भी करदाता जांच के दौरान कभी भी बकाया टैक्स जमा कर सकता है। जांच कार्यालय ने सभी मुख्य कमिश्नरों से कहा है कि जांच के दौरान कारोबारियों को टैक्स जमा करने के लिए बाध्य करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
जीएसटी की जांच शाखा ने स्पष्ट किया है कि तलाशी या निरीक्षण या जांच के दौरान बकाया वसूली की जरूरत वाली कोई भी परिस्थिति नहीं हो सकती है। हालांकि, इस तरह की कार्यवाही से पहले या अन्य किसी भी स्तर पर स्वेच्छा से भुगतान करने के लिए करदाताओं पर कोई रोक नहीं है। साथ ही अधिकारियों की ओर से करदाताओं को स्वैच्छिक रूप से टैक्स जमा करने की जानकारी देनी चाहिए।
एमएमआरजी एंड एसोसिएट्स के सीनियर पार्टनर रजत मोहन का कहना है कि इन निर्देशों का सही तरीके और ठीक उद्देश्य से पालन किया जाए तो कारोबार करने में आसानी होगी। हालांकि, अधिकतर विभागीय स्पष्टीकरणों की तरह इन निर्देशों का प्रयोग पूरी तरह से जांच दल पर निर्भर करेगा। अर्नस्ट एंड यंग इंडिया के टैक्स पार्टनर बिपिन सप्रा का कहना है कि नए निर्देशों से अधिकारियों की ओर से जांच के दौरान सख्त कार्यवाही पर रोक लगेगी। चूंकि अधिकारियों के पास बैंक खातों को तलब करने और फ्रीज करने का अधिकार है, ऐसे में किसी भी सीधे निर्देश से थोड़ी मदद मिल सकती है।