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ओडिशा: विधायकों-मंत्रियों की वेतन बढ़ोतरी पर मचा बवाल, सरकार ने तीन गुना सैलरी बढ़ाने वाला बिल लिया वापस

Thu, 26 Mar 2026 05:45 PM IST
Himanshu Singh Chandel न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर

सार

ओडिशा में विधायकों और मंत्रियों के वेतन में तीन गुना बढ़ोतरी वाले विवादित विधेयकों को सरकार ने वापस ले लिया है। यह फैसला भारी विरोध और राजनीतिक दबाव के बाद लिया गया। इन विधेयकों से मुख्यमंत्री और विधायकों का वेतन काफी बढ़ने वाला था।
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ओडिशा विधानसभा - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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ओडिशा में विधायकों और मंत्रियों की वेतन बढ़ोतरी को लेकर उठे भारी विवाद के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। विधानसभा सचिवालय ने उन सभी संशोधन विधेयकों को वापस लेने की अधिसूचना जारी कर दी है, जिनमें वेतन और भत्तों में लगभग तीन गुना बढ़ोतरी का प्रस्ताव था। इस फैसले को जनता और विपक्ष के दबाव के बाद उठाया गया कदम माना जा रहा है।
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विधानसभा सचिव सत्यब्रत राउत ने सभी सदस्यों को जानकारी दी कि संसदीय कार्य मंत्री डॉ. मुकेश महालिंग ने इन विवादित विधेयकों को वापस लेने की मंशा जताई है। इनमें विधायकों, मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन, भत्ते और पेंशन से जुड़े चार अहम विधेयक शामिल थे। ये सभी विधेयक दिसंबर 2025 में पारित किए गए थे और इन्हें पांच जून 2024 से लागू किया जाना था।

क्या था वेतन बढ़ोतरी का पूरा मामला?
इन विधेयकों के तहत मुख्यमंत्री का वेतन बढ़कर करीब 3.74 लाख रुपये प्रति माह होने वाला था। वहीं विधायकों का वेतन लगभग 1 लाख रुपये से बढ़कर करीब 3.45 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान था। इस बड़े इजाफे के कारण ओडिशा के विधायक देश के सबसे अधिक वेतन पाने वाले नेताओं में शामिल हो सकते थे।
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क्यों हुआ इतना विरोध और क्या उठे सवाल?
इस फैसले के बाद राज्य में व्यापक विरोध शुरू हो गया था। आम जनता से लेकर विभिन्न संगठनों तक ने सवाल उठाए कि क्या इतनी बड़ी वेतन बढ़ोतरी जरूरी थी। लोगों ने इसके समय और जरूरत पर भी सवाल खड़े किए। यह मुद्दा राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन गया।

राजनीतिक दलों का क्या रहा रुख?
बीजद प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस बढ़ोतरी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई थी। इसके बाद सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी बीजद, दोनों दलों के नेताओं ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। विधेयकों को वापस लेने का फैसला सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। इससे साफ है कि जनभावनाओं और राजनीतिक दबाव को देखते हुए सरकार ने कदम पीछे खींचे हैं। अब इस मुद्दे पर आगे क्या नया प्रस्ताव आता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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