बालासोर रेल हादसे के दो दिन बीतने के बाद रविवार को भी पीड़ितों की तलाश में उनके परिजन और बचावकर्मी जुटे रहे। वे हाथों में परिजनों की फोटो लिए लाश दर लाश उन्हें पहचानने की कोशिश कर रहे हैं, अस्पतालों में घायलों से मिल रहे हैं। उधर, शवों में सड़न फैलने लगी है। मुर्दा घरों में लाशों का ढेर लगा है, हालात यह है कि लाशों को रखने के लिए बनाए गए अस्थायी मुर्दाघर भी भर चुके हैं। करीब 187 शवों की पहचान तक नहीं हो सकी है।
100 से ज्यादा शव भुवनेश्वर एम्स भेजे गए
अधिकारियों के मुताबिक, नूशी के स्कूल में शव रखे हुए थे। यहां 100 से ज्यादा शवों की पहचान नहीं हो सकी है। शव सड़ने के कारण अब इन्हें भुवनेश्वर एम्स भेजा गया है। स्टेट फोरेंसिक लैब में इनका परीक्षण होगा।
क्षत-विक्षत शव पहचानना मुश्किल
अधिकारियों के मुताबिक, कुछ शव टुकड़ों में कट गए हैं, कुछ को बिजली के झटके लगे हैं, जिनसे उनकी पहचान करना मुश्किल है। हताहत बहुत सारे यात्री प्रवासी मजदूर थे, इसलिए उनके परिवार धीरे-धीरे ओडिशा पहुंच रहे हैं। सरकार ने वेबसाइट पर भी मृतकों की तस्वीरें अपलोड की हैं। एजेंसी
- 1175 घायल भेजे गए अस्पतालों में
- 793 घायल यात्रियों को छुट्टी दी
- 382 का इलाज अब भी जारी
अब तक सिर्फ 88 शवों की शिनाख्त
ओडिशा के मुख्य सचिव प्रदीप जेना ने बताया, शवों की शिनाख्त के बाद उन्हें परिजनों को सौंपा जा रहा है। अब तक 88 शवों की शिनाख्त हुई है और रविवार सुबह तक 78 शव परिजनों को सौंपे जा चुके थे। बाकी 10 को सौंपने की प्रक्रिया जारी थी। मुख्य सचिव ने कहा, 170 शवों को भुवनेश्वर के मुर्दाघरों और अन्य अस्पतालों- एम्स, कैपिटल अस्पताल, एसयूएम, केआईएम और एएमआरआई अस्पताल भेज दिया गया है। बाकी शवों को भी वहां भेजा जाएगा। जिन शवों की पहचान नहीं हुई है, उनकी तस्वीरें वेबसाइट पर डाली गई हैं।
हादसे के चलते 123 ट्रेनें रद्द
इस रूट पर चलने वाली 123 से अधिक ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। इससे यात्रियों को बेहद कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे 56 ट्रेनों को परिवर्तित रूट से चला रहा है तो 10 से अधिक ट्रेन अपने गंतव्य स्टेशन से संचालित नहीं हो रही है। हादसे के कारण प्रभावित ज्यादातर ट्रेनें दक्षिण और दक्षिण-पूर्व रेलवे जोन की हैं। 189 ट्रेनें प्रभावित रहीं।
दिल्ली से डॉक्टरों की टीम पहुंची, 100 से ज्यादा आईसीयू में
दिल्ली/बालासोर। घायलों के इलाज के लिए दिल्ली से डॉक्टरों की एक टीम रविवार को बालासोर पहुंच गई। इस टीम में दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के अलावा डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, घायलों में 100 से ज्यादा मरीजों को तत्काल आईसीयू देखभाल की जरूरत है।
दो दिन बिना रुके एक हजार से अधिक कर्मचारी जुटे रहे, तब चालू हो पाया ट्रैक
भारी मशीनरी और स्टाफ लगाकर रेलवे ने दुर्घटना स्थल पर तेजी से सुधार कार्य किए। प्रयास था पूर्वी और दक्षिणी भारत को जोड़ने वाले मुख्य रेल ट्रैक जल्द से जल्द उपयोग में लाए जा सकें। हादसे के बाद दो दिन में एक हजार कर्मचारी लगातार ट्रैक को चालू करने के लिए काम करते रहे। पहले क्षतिग्रस्त ट्रैक को सुधारा गया। इसके बाद ओवर-हेड बिजली केबल को सुधारने का काम शुरू किया गया। तब जाकर 51 घंटे बाद ट्रैक को चालू किया जा सका।
रेल हादसे में माता-पिता को खोने वाले बच्चों की स्कूली शिक्षा की जिम्मेदारी उठाएगा अदाणी समूह
बालासोर ट्रेन हादसे में मदद के हाथ लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस बीच, अदाणी समूह के प्रमुख गौतम अदाणी ने हादसे में अनाथ हुए बच्चों की मदद के संबंध में बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि रेल हादसे में अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों की स्कूली शिक्षा की जिम्मेदारी अदाणी समूह लेगा। उन्होंने ट्वीट कर इस घटना पर दुख जताते हुए इस मदद का ऐलान किया।
छोटू के साथ खत्म हुआ पक्के घर का सपना
पश्चिम बंगाल में बर्धमान निवासी 18 वर्षीय छोटू सरकार का सपना अपने परिवार के लिए पक्का घर बनाने का था। सपना पूरा करने के लिए वह काम की तलाश में निर्माण श्रमिक पिता के साथ केरल जा रहा था। हालांकि सपना ट्रेन हादसे में मौत के साथ अधूरा रह गया। हादसे में छोटू के पिता सुखलाल बाल-बाल बच गए, लेकिन अपने मृत बेटे को देखकर वह टूट गए। छोटू की मौत की खबर कटवा के कोरुई गांव में पहुंचते ही परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।
ग्रामीणों ने बताया, सुखलाल अरसे से केरल में राजमिस्त्री का काम कर रहे हैं। वह बेटे को पहली बार अपने साथ ले जा रहे थे। सुखलाल परिवार को बेहतर जिंदगी देना चाहते थे। इसके लिए वह बेटे को राजमिस्त्री का काम सिखाना चाहते थे। पिता-पुत्र को मिलाकर गांव के 10 लोग कोरोमंडल से यात्रा कर रहे थे। घायल सुखलाल की हालत गंभीर है, ओडिशा के अस्पताल में इलाज चल रहा है। उनके साथ गए लोगों का कोई पता नहीं चल पाया है। कैथन गांव के सद्दाम शेख (28) की भी मौत हो गई है। वह निर्माण मजदूर के रूप में काम करने के लिए केरल जा रहा था। सद्दाम का एक महीने का बेटा है।
काम की तलाश में तमिलनाडु जा रहे तीन सगे भाइयों की मौत से तबाह हुआ परिवार
हादसे में प. बंगाल के दक्षिणी 24 परगना जिले के तीन भाइयों की मौत से पूरा परिवार बिखर गया। तीनों भाई कुछ दिन पहले ही घर लौटे थे और कृषि मजदूर के तौर पर काम की तलाश के लिए कोरोमंडल एक्सप्रेस से फिर तमिलनाडु जा रहे थे। बसंती उत्तर के चरनीखाली गांव के रहने वाले हरन (40), निशिकांत (35) और दिबाकर गायेन (32) की मौत की खबर से पूरा गांव सदमे में है।
तलाश तो खत्म हुई, लेकिन पति की जगह मिला शव
अपने पति को तलाश रहीं 49 साल की कंचन चौधरी भी इनमें शामिल थीं। उनकी तलाश एक शव पर खत्म हुई, जो उनके पति का ही था। लगातार रो रहीं कंचन ने बताया कि गांव के 5 लोग कोरोमंडल एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे थे। इनमें से चार लोग घायल हुए हैं। वहीं उनके पति का शव मिला है।
300 पीड़ितों को दिया गया मुआवजा
रेल मंत्री ने कहा कि दुर्घटना के करीब 300 पीड़ितों को मुआवजा दिया गया है। हमने सोरो अस्पताल में पीड़ितों और डॉक्टरों से मुलाकात की। हैदराबाद, चेन्नई, बंगलूरू, रांची, कोलकाता तथा अन्य स्थानों से विशेष ट्रेन चलाई जा रही हैं ताकि पीड़ित इलाज के बाद घर लौट सकें। ओडिशा व पं. बंगाल सरकार सरकार ने मृतकों के परिजन को 5-5 लाख, आंध्र प्रदेश ने 10-10 लाख अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
हादसे की पटरी पर बिखरी मिलीं प्रेम कविताएं
कोरोमंडल एक्सप्रेस के बिखरे कोचों और तबाही वाले मंजर के बीच पटरी पर बिखरे कुछ पन्नों में बांग्ला भाषा में लिखीं प्रेम कविताएं पढ़ने वालों को भावुक कर गईं। ये पन्ने किसी डायरी का हिस्सा थे। पन्नों पर हाथियों, मछलियों और सूर्य की तस्वीरों के साथ प्रेम का इजहार किया गया है। शायद किसी यात्री ने अपने छुट्टियों के दिनों में अपने महबूब के नाम पत्र लिखा था। जिसके बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है।
बांग्ला भाषा में लिखी लाइनें कुछ इस तरह से हैं-अल्पो अल्पो मेघ थेके हल्का ब्रिस्टी होय, छोटो चोटो गोलपो ठेके भालोबासा सृष्टि होय। हिंदी में इसका अर्थ है-मैं तुम्हें हर समय प्यार करना चाहता हूं, तुम मेरे दिल के पास हो।
एक पेज पर एक अधूरी कविता मिली है जो इस प्रकार है- भालोबेशी टोके चाई साराखोन, अचिस तुई मोनेर साठे। इसका आर्थ है-प्यार से मुझे हर समय आपकी जरूरत है, आप हर समय मेरे दिमाग में हैं। कविता के पेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। लोग इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। कोई हृदयविदारक कह रहा है तोई कह रहा है कि यह दिखाता है कि जीवन अप्रत्याशित था।
बचाव कार्य में लगी टीमें और स्थानीय पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि इन पन्नों को संभाल कर रख लिया गया है। किसी ने कविता पर दावा नहीं किया है और न ही कोई ऐसा व्यक्ति ही सामने आया है जिसने कविता लिखने वाले से संबंधित हो। जो पन्ने मिले हैं उनमें से किसी पर भी कविता लिखने वाले का नाम नहीं लिखा है।
ट्रेन में यात्रा कर रहे थे एनडीआरएफ जवान वेंकटेश, भेजा पहला अलर्ट
अधिकारियों ने बताया कि रेल हादसे का पहला अलर्ट एनडीआरएफ के जवान वेंकटेश एनके ने भेजा जो छुट्टी पर थे और उसी ट्रेन में यात्रा कर रहे थे, जो दुर्घटनाग्रस्त हुई। वे हावड़ा से चेन्नई जा रहे थे, उनका कोच बी-7 भी पटरी से उतरा, लेकिन खुशकिस्मती से दूसरे कोचों से टकराया नहीं। हादसे के तुरंत बात उन्होंने कंट्रोल रूम में तस्वीरें व लाइव लोकेशन भेजीं। इसी से शुरुआती बचाव दल मौके पर पहुंचे।
वेंकटेश ने बताया कि हादसे के वक्त उन्हें बड़ा झटका लगा, देखा कि यात्री नीचे गिर रहे हैं। उन्होंने तुरंत अपने पास मौजूद यात्री को बाहर निकाला। फिर वे वापस लौटे और बचाव कार्य व सूचनाएं देने में जुट गए। घने अंधेरे की वजह से मोबाइल फोन की रोशनी में घायलों को तलाशा और एक-एक कर बाहर निकालते रहे।
एनडीआरएफ ने 44 यात्रियों को जीवित निकाला
राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) के जवानों ने रेल हादसे के बाद 44 यात्रियों को जीवित निकाला। वहीं 112 शव भी निकाले।
रेलवे सुरक्षा आयुक्त आज और कल करेंगे पूछताछ
दक्षिण पूर्वी सर्किल के रेलवे सुरक्षा आयुक्त सोमवार और मंगलवार को साउथ इंस्टीट्यूट ऑफ खड़गपुर में बालासोर ट्रेन हादसे को लेकर पूछताछ करेंगे। रेलवे सुरक्षा आयुक्त तीन ट्रेनों के हादसे के संदर्भ में वैधानिक जांच करेंगे। रेल यात्री, स्थानीय लोग और अन्य निकाय सुबह 9 बजे और दिए गए स्थान पर उपस्थित होकर दुर्घटना से संबंधित किसी भी जानकारी के संबंध में आयोग के समक्ष बयान दे सकते हैं।