ओडिशा सरकार ने मंगलवार को उच्च न्यायालय को बताया कि राज्य का गृह विभाग जल्द ही थानों में उचित व्यवहार के लिए पुलिसकर्मियो के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करेगा। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी दयाल गंगवार ने एक हलफनामे के जरिए उड़ीसा उच्च न्यायालय को यह जानकारी दी। उच्च न्यायालय ने इसके लिए आदेश जारी किया था।
भरतपुर में पूरा मामला क्या हुआ था?
यह कदम भुवनेश्वर के भरतपुर पुलिस थान में हुई हालिया घटना का बाद उठाया गया है, जहां सेना के एक अधिकारी और उनकी महिला मित्र के साथ पुलिस कर्मचारियों ने कथित तौर पर मारपीट की थी। यह घटना सितंबर के शुरुआत में हुई थी। सड़क पर झगड़े की शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने पहुंचे सेना अधिकारी उनकी मित्री के साथ कथित मारपीट के बाद जनता में आक्रोश पैदा हो गया था। इस मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन पर जताई।
'थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए किए जा रहे उपाय'
गंगवार ने अदालत से कहा कि राज्यभर के सभी पुलिस थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए उपाय किए जा रहे हैं और यह काम 15 दिनों के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार दो नई वीडियो प्रबंधन प्रणालियों (वीएमएस) पर काम कर रही है, जिससे डीजीपी और सभी 32 जिला पुलिस पुलिस प्रमुख सीसीटीवी फुटेज की निगरानी कर सकेंगे।
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के कदमों पर जताया संतोष
उच्च न्यायालय ने सेना अधिकारी से जुड़े मामले में राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर संतोष जताया। मामले पर अगले महीने फिर सुनवाई होगी। इस बीच, राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया है। पुलिस की जांच को अपराध शाखा को सौंप दिया गया है और मामले में शामिल पांच पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।