फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pigeons: 21वीं सदी में भी ओडिशा पुलिस को कबूतरों पर भरोसा, जानिए क्यों पुलिस दे रही है ट्रेनिंग

Wed, 21 Jun 2023 06:34 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर

सार

कटक पुलिस ने बताया कि पिछले चार दशकों में कम से कम दो बार कबूतर बेहद अहम साबित हुए हैं, जब आपदा के दौरान संचार लाइनें ठप होने पर इनका इस्तेमाल किया गया। एक बार 1999 में जब एक शक्तिशाली चक्रवात ने तटीय क्षेत्रों में तबाही मचाई थी।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दुनिया संचार क्रांति की दिशा में लगातार आगे बढ़ती जा रही है। फोन, मोबाइल, मैसेजिंग, इंटरनेट जैसी सुविधाएं अब आम बात हो गई है। इस दौर में भी संदेश पहुंचाने के लिए ओडिशा पुलिस का कबूतरों पर भरोसा कायम है। यहां कबूतरों के दस्ते का संरक्षण यह सोचकर किया जा रहा है कि किसी आपदा की स्थिति में संचार के तमाम माध्यम काम न आने पर इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

पक्षियों को संवाद के लिए इस्तेमाल किया जाता था

विज्ञापन

ब्रिटिश उपनिवेशकाल में जब पुलिस स्टेशनों में पक्षियों को संवाद के लिए इस्तेमाल किया जाता था, तब से ही राज्य की संदेश वाहक कबूतर सेवा 100 से अधिक बेल्जियम होमर कबूतरों को रोजगार देती आ रही है। कटक के पुलिस महानिरीक्षक सतीश कुमार गजभिए कहते हैं, अब जबकि कबूतर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर सरकारी आयोजनों में रस्मी भूमिका निभाने का साधन रह गए हैं, हम आने वाली पीढ़ियों के लिए इन्हें संरक्षित करते आ रहे हैं। 

4 दशक में दो बार बहुत काम आए
कटक पुलिस ने बताया कि पिछले चार दशकों में कम से कम दो बार कबूतर बेहद अहम साबित हुए हैं, जब आपदा के दौरान संचार लाइनें ठप होने पर इनका इस्तेमाल किया गया। एक बार 1999 में जब एक शक्तिशाली चक्रवात ने तटीय क्षेत्रों में तबाही मचाई थी और उससे पहले 1982 में जब राज्य के कुछ हिस्सों को विनाशकारी बाढ़ झेलनी पड़ी थी। हल्के ओनियन पेपर में लिखे संदेशों को एक कैप्सूल में डालकर उनके पैर में बांध दिया जाता है। इसे लेकर कबूतर 55 किमी प्रति घंटे की गति से उड़ सकते हैं। वह एक बार में 800 किमी तक की दूरी तय कर सकते हैं।

इस तरह देते हैं प्रशिक्षण

विज्ञापन

कबूतरों की देखभाल में लगे परशुराम नंदा कहते हैं, हम पक्षियों को पांच से छह सप्ताह की उम्र में प्रशिक्षित करना शुरू करते हैं। फिर जैसे-जैसे वे बड़े होते जाते हैं, हम उन्हें कुछ दूर ले जाकर छोड़ देते हैं और वे आराम से लौट आते हैं। धीरे-धीरे दूरी बढ़ाई जाती है, और 10 दिनों में ये लगभग 30 किमी से लौटने में सक्षम हो जाते हैं। पुलिस के साथ काम करने वाले इतिहासकार अनिल धीर बताते हैं कि अध्ययनों से साबित होता है कि कबूतर हजारों मील दूर से अपने गंतव्य को देख सकते हैं। उनके मुताबिक, संचार के तमाम साधन भले ही काम करना बंद कर दें, लेकिन कबूतर कभी विफल नहीं होंगे।

 

 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें