ओडिशा वन विभाग के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि राज्य के गर्जनपहाड़ संरक्षित वन में एक ब्लैक पैंथर मौजूद है। कैमरे में उसकी गतिविधि कैद हुई है। राज्य के वन्य जीव विभाग को कई बार ब्लैक पैंथर के मौजूद होने की खबरें मिलती रही हैं। खासतौर से भंजानगर के कालीकंबा संरक्षित वन और नवारंगपुर के वन क्षेत्र में लेकिन यह पहली बार है जब कैमरे में उसकी गतिविधी कैद हुई है।
ओडिशा के मुख्य वन्यजीव वार्डन संदीप त्रिपाठी ने कहा, हमने पहले ही काले बाघ और
ब्लैक पैंथर की उपस्थिति की पुष्टि की थी। इससे यह आशंका है कि भारत के अंदर केवल राज्य में यह दोनों मौजूद हैं। हाल ही में पश्चिमी ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के हेमगीर रेंज के अंतर्गत आने वाले संरक्षित वन में ब्लैक पैंथर की गतिविधी कई कैमरों में कैद हुई है।
त्रिपाठी ने कहा, कैमरे में ब्लैक पैंथर की मां भी कैद हुई है। उसकी मां एक सामान्य तेंदुआ है और उसका बेटा गहरे रंग का है। कुछ जैविक कारणों की वजह से बच्चे का रंग काला हो गया है। गर्जनपहाड़
संरक्षित वन में दिसंबर 2015 को कैमरे लगाए गए थे। हाल ही में कैमरा में लगातार ब्लैक पैंथर वाले फुटेज कैप्चर किए गए हैं। आधिकारियों ने अभी तक ब्लैक पैंथर की उम्र को लेकर कोई सूचना साझा नहीं की है।
ओडिशा के वनों में आखिरी बार साल 2016 में वन्यजीव जनगणना हुई थी जिसमें 318 तेंदुओं की जानकारी मिली थी। इस जनगणना में बाघों की संख्या 40 थी। कैमरे में पहली बार साल 2007 में सिमिलीपाल बाघ अभ्यारण्य में एक काला बाघ मिला था। गहरे रंग के बाघ केरला, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गोवा, तमिलनाडु, आसाम और अरुणाचल प्रदेश में पाए जाते हैं। इससे पहले पिछले महीने छत्तीसगढ़ के उड़ंती-सीतीनदी बाघ अभ्यारण्य में एक ब्लैक पैंथर दिखाई दिया था।