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विधानसभा चुनाव परिणाम 2019: ओडिशा में 19 साल से सत्ता में हैं पटनायक, इस बार दांव पर है साख

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Thu, 23 May 2019 10:44 AM IST

सार

  • लोकसभा चुनाव के साथ कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हुए हैं।
  • ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए हैं।
  • ओडिशा में विधानसभा की कुल 146 सीट हैं।
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नवीन पटनायक - फोटो : File Photo

देश में लोकसभा और कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं। जिनके नतीजों पर सबकी नजर टिकी हैं। लोकसभा चुनाव के साथ जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, वो राज्य हैं- ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश। इस बार यहां 146 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। चलिए जानतें हैं क्या है ओडिशा का राजनीतिक समीकरण-

ओडिशा-

2014 में कैसी थी स्थिति?

ओडिशा में विधानसभा की कुल 147 सीटें हैं। यहां 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी बीजू जनता दल (बीजेडी) को 117 सीटें मिली थीं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 10 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 16 सीटें मिली थीं जबकि अन्य को 4 सीटें मिली थीं। 

 

पार्टी का नाम सीटों की संख्या
बीजू जनता दल 117
भारतीय जनता पार्टी 10
कांग्रेस 16
अन्य 4

 

 

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नवीन पटनायक - फोटो : File Photo
देश में लोकसभा और कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं। जिनके नतीजों पर सबकी नजर टिकी हैं। लोकसभा चुनाव के साथ जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं, वो राज्य हैं- ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश। इस बार यहां 146 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। चलिए जानतें हैं क्या है ओडिशा का राजनीतिक समीकरण-

ओडिशा-

2014 में कैसी थी स्थिति?

ओडिशा में विधानसभा की कुल 147 सीटें हैं। यहां 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी बीजू जनता दल (बीजेडी) को 117 सीटें मिली थीं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 10 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को 16 सीटें मिली थीं जबकि अन्य को 4 सीटें मिली थीं। 

 
पार्टी का नाम सीटों की संख्या
बीजू जनता दल 117
भारतीय जनता पार्टी 10
कांग्रेस 16
अन्य 4
 

 

नवीन पटनायक - फोटो : File Photo

क्यों मजबूत है बीजेडी?

राज्य में बीते 19 सालों से बीजेडी सबसे मजबूत पार्टी बनी हुई है। यहां के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राज्य की बेहतरी के लिए बहुत सी योजनाओं की शुरुआत की। इनमें महिलाओं, स्कूली छात्राओं, किसानों और यहां तक कि पत्रकारों के लिए भी कई योजनाएं शामिल हैं। 

इसके अलावा यहां आए फैनी चक्रवात के बाद भी राज्य सरकार ने लोगों की भलाई के लिए बहुत सी योजनाओं पर काम किया है। लोगों को ना केवल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया बल्कि उन्हें भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं भी मुहैया कराई गईं। इसके अलावा राज्य में संचार संबंधी सेवाएं बेहतर हुई हैं। कानून व्यवस्था भी बेहतर मानी जाती है। 

इसके साथ ही ओडिशा सरकार ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए भी बहुत सी योजनाओं की शुरुआत की है। जिनमें खुशी और महिला किसानों को निःशुल्क इंटरनेट-सक्षम स्मार्टफोन उपलब्ध कराने के लिए फ्री स्मार्टफोन योजना प्रमुख हैं। यहां उनके लिए करीब 70 लाख सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाए गए हैं। इसके अलावा यहां चुनावों में भी जाति धर्म का कोई प्रभाव नहीं है।  

नवीन पटनायक (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

कहां कमजोर पड़ सकती है बीजेडी?


वैसे तो ओडिशा में बीजेडी की स्थिति काफी मजबूत है। लेकिन ऐसा नहीं है कि इस राज्य की जनता को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है। राज्य में निचली जाति के लोगों को अभी भी छुआछूत का सामना करना पड़ता है। यहां नौकरियों की भी कमी है, जिसके कारण युवाओं को नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है।

इसके अलावा स्वास्थ्य के मामले में भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां कॉर्पोरेट घरानों ने भारी निवेश किया है, बावजूद इसके गुजरात के कपड़ा उद्योग में सबसे अधिक श्रमिक ओडिशा के ही हैं।


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