उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की राह पर चलते हुए गुजरात ने भी श्रम कानूनों को आसान बनाने की घोषणा की। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि, कम से कम 1,200 दिनों के लिए काम करने वाली सभी नई परियोजनाओं या पिछले 1,200 दिनों से काम कर रहीं परियोजनाओं को श्रम कानूनों के सभी प्रावधानों से छूट दी जाएगी। हालांकि तीन प्रावधान लागू रहेंगे।
राज्य सरकार ने वैश्विक कंपनियों के लिए 33,000 हेक्टेयर जमीन की भी पहचान की है, जो चीन से अपना कारोबार स्थानांतरित करना चाहती हैं। न्यूनतम मजदूरी के भुगतान से संबंधित कानूनों, सुरक्षा मानदंडों का पालन करना तथा औद्योगिक दुर्घटना के मामले में श्रमिकों को पर्याप्त मुआवजा देना जैसे कानूनों के अलावा कंपनियों पर श्रम कानून का कोई अन्य प्रावधान लागू नहीं होगा।
केंद्र ने किया सुधारों का समर्थन
केंद्र सरकार ने आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिए संरचनात्मक श्रम सुधारों का समर्थन किया। राज्य सरकार द्वारा लाए गए व्यापक श्रम कानून में बदलाव और छूट का समर्थन किया। केंद्र सरकार और मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों को विश्वास है कि सुधारवादी मानसिकता और श्रम अनुपालन अवकाश अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे और इससे विकास सुनिश्चित होगा।
ट्रेड यूनियन कर रहे विरोध
हालांकि, मजदूर यूनियनों और कुछ अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि इस परिवर्तन से श्रम बाजार में अराजकता फैल सकती है और श्रमिकों की उत्पादकता को नुकसान हो सकता है। कानून में बदलाव से ट्रेड यूनियन इसलिए परेशान हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति में उन्हें लेबर का शोषण होने का शक है। अभी नियम काफी सख्त हैं, लेकिन फिर भी कई कंपनियों में मजदूरों का शोषण होता है, जिससे मजदूर परेशान हैं।