International Toilet Festival
इट्स नो जोक नाम से आई एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में 60.4 फीसदी लोगों को शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है। 1990 के मुकाबले इस आंकड़े में 22.8 फीसदी की कमी हुई है मगर अब भी काफी सुधार करने की आवश्यकता है। शौचालय उपलब्ध करा पाने के मामले में दक्षिण एशिया के आठ देशों में भारत 7वें स्थान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक 77.4 करोड़ लोग देश में ऐसे हैं जो खुद के घर में शौचालय नहीं होने के कारण बाहर शौच जाकर अपमानित होने को मजबूर हैं।
आठ करोड़ शौचालयों के निर्माण के बावजूद अब भी 15.7 करोड़ लोग बिना शौचालय के जीवन बिता रहें हैं। शहरी इलाकों में खुले में शौच जाने वालों की संख्या 4 करोड़ 10 लाख है। वर्ल्ड टॉयलेट डे पर जारी एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में हर रोज निकलने वाला कूड़ा और गंदगी ओलिंपिक स्विमिंग पूल के आकार के 8 स्विमिंग पूल भर सकती है। साथ ही इस रिपोर्ट में भारत के गांवों से शहरों में हो रहे पलायन को लेकर भी चिंता जाहिर की गई है। तेजी से शहरों का रूप ले रहे इलाकों में 38 करोड़ 10 लाख लोग रह रहे हैं। यह जनसंख्या पश्चिमी यूरोप की जनसंख्या के लगभग बराबर है।