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ब्रिटेन में ढाई गुना बढ़ी प्रवासियों की संख्या, भारत में 23 लाख प्रवासी घटे

Sun, 08 Apr 2018 08:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पढ़ाई और नौकरी के लिए कई लोग विदेशों का रुख कर लेते हैं। दुनिया में इस तरह का पलायन लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में लोगों की सबसे पसंदीदा जगह ब्रिटेन और अमेरिका बन गई है। प्यू रिसर्च ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 27 सालों में ब्रिटेन में प्रवासियों की संख्या 36.5 लाख से बढ़कर 88.4 लाख हो गई है। इस रिसर्च में साल 1990 से लेकर 2017 के बीच दूसरे देशों से आए लोगों को इसमें शामिल किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में प्रवासियों की संख्या 140 फीसदी बढ़ी जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 110 फीसदी बढ़ा। यानि अमेरिका में साल 1990 में 2.33 करोड़ प्रवासी थे जिनकी संख्या 2017 में बढ़कर 4.98 करोड़ पर पहुंच गई। 

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बता दें कि प्यू ने अपनी रिपोर्ट में एक साल या उससे अधिक समय से दूसरे देशों में रहने वाले प्रवासियों को शामिल किया है। जिसमें कारोबार, नौकरी और पढ़ाई के उद्देश्य से विदेशों में रह रहे लोग शामिल थे। इसमें उन लोगों को शामिल नहीं किया गया जो पर्यटन, अल्पकालीन कार्य या सैन्य क्षेत्र में तैनाती के उद्देश्य से विदेशों में रह रहे हैं। रिपोर्ट से यह बात भी सामने आई है कि अमेरिका के बाद जर्मनी लोगों की पसंदीदा जगह है। 

आंकड़ों के मुताबिक 1.2 करोड़ लोग दूसरे देशों से आकर जर्मनी में रह रहे हैं। वहीं चौथा नंबर रूस का आता है जिसमें प्रवासियों की संख्या 1.16 करोड़ है। इस रिपोर्ट में रूस, अमेरिका और ब्रिटेन के अलावा अन्य देशों को भी शामिल किया गया। रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब में (1.01 करोड़), ब्रिटेन (88 लाख), यूएई (81 लाख), कनाडा (78 लाख), फ्रांस (77 लाख), ऑस्ट्रेलिया (67 लाख) और स्पेन में (58 लाख) लोग प्रवासी के तौर पर रह रहे हैं। 

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भारत में घटी प्रवासियों की संख्या

प्यू द्वारा की गई रिसर्च के मुताबिक यह पलायन पिछले तीन दशकों में तीन गुना बढ़ा है। यह संख्या कुल प्रवासियों की संख्या की 4 फीसदी है। यानि पिछले साल दुनिया में 1.06 करोड़ लोगों ने पलायन किया है। प्यू के अनुसार संयुक्त राष्ट्र संघ ने उन्हीं लोगों को प्रवासियों की श्रेणी में रखा है जो प्रवासी कैंपों में रह रहे हों या वहां उनके बच्चों का जन्म हुआ हो। देश छोड़ने वाले लोगों में अरब देशों और उत्तरी अमेरिका के लोगों का नाम प्रमुख है जहां देश छोड़ने वालों की संख्या 2.5 करोड़ है।

इन दोनों देशों के अलावा इस लिस्ट में मिस्त्र, लीबिया, मोरक्को, सूडान, ट्यूनीशिया और पश्चिमी सहारा के लोग भी शामिल हैं। यानि यहां की करीब 39 फीसदी जनसंख्या प्रवासी बन चुकी है। इसके अलावा लीबिया के हजारों लोग इटली जाकर वहां के नागरिक बन गए। पिछले 7 सालों में भी हजारों लोग नाव में सवार होकर इटली पहुंचे। जिसके बाद लीबीया के करीब 1000 लोगों को वहां की नागरिकता मिली।

इसके अलावा प्यू की रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि भारत में 23 लाख प्रवासी घटे हैं। यहां 2017 तक 52.4 लाख प्रवासी ऐसे हैं जिनका जन्म दूसरे देशों में हुआ है। वहीं यह संख्या 1990 में 75 लाख के करीब थी। 
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