प्यू द्वारा की गई रिसर्च के मुताबिक यह पलायन पिछले तीन दशकों में तीन गुना बढ़ा है। यह संख्या कुल प्रवासियों की संख्या की 4 फीसदी है। यानि पिछले साल दुनिया में 1.06 करोड़ लोगों ने पलायन किया है। प्यू के अनुसार संयुक्त राष्ट्र संघ ने उन्हीं लोगों को
प्रवासियों की श्रेणी में रखा है जो प्रवासी कैंपों में रह रहे हों या वहां उनके बच्चों का जन्म हुआ हो। देश छोड़ने वाले लोगों में अरब देशों और उत्तरी अमेरिका के लोगों का नाम प्रमुख है जहां देश छोड़ने वालों की संख्या 2.5 करोड़ है।
इन दोनों देशों के अलावा इस लिस्ट में मिस्त्र, लीबिया, मोरक्को, सूडान, ट्यूनीशिया और पश्चिमी सहारा के लोग भी शामिल हैं। यानि यहां की करीब 39 फीसदी जनसंख्या प्रवासी बन चुकी है। इसके अलावा लीबिया के हजारों लोग इटली जाकर वहां के नागरिक बन गए। पिछले 7 सालों में भी हजारों लोग नाव में सवार होकर इटली पहुंचे। जिसके बाद लीबीया के करीब 1000 लोगों को वहां की नागरिकता मिली।
इसके अलावा प्यू की रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि भारत में 23 लाख प्रवासी घटे हैं। यहां 2017 तक 52.4 लाख प्रवासी ऐसे हैं जिनका जन्म दूसरे देशों में हुआ है। वहीं यह संख्या 1990 में 75 लाख के करीब थी।