बुधवार को रायबरेली के ऊंचाहार के एनटीपीसी के प्लांट नंबर 6 में बॉयलर फटने के बाद का नजारा दिल दहलाने वाला था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि चारों ओर मजदूरों की लाशें बिखरी पड़ीं थीं। हादसा इतना भयानक था कि उस समय बॉयलर के आस-पास ही नहीं बल्कि उस पूरे फ्लोर पर मौजूद किसी के भी बचने की उम्मीद कम ही है। बॉयलर के पास काम कर रहा एक भी मजदूर शायद ही बचा हो। चारों ओर सिर्फ चीख पुकार मची हुई थी। आधे घंटे तक चारों ओर सिर्फ धुआं ही धुंआ था।
हादसे में घायल हुए मजदूरों को एक के बाद अस्पताल पहुंचाया जा रहा था। मजदूर इतना झुलस चुके थे जिसने भी उन्हें देखा कांप गया। अधिकतर मजदूर 80 फीसदी से ज्यादा झुलस गए थे।
इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 26 हो चुकी है। जबिक घायलों की संख्या 200 से अधिक हो चुकी है।
घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ मजदूरों की बिगड़ी हालत को देखकर लखनऊ रेफर कर दिया गया। अफरातफरी के बीच लोगों की आंखे अपनों को तलाश रही थीं। जिस समय हादसा हुआ उस समय यूनिट में करीब 450 मजदूर मौजूद थे। उन्हीं में से एक कर्मचारी हैं हिमांशु, उन्होंने बताया कि जिस समय बॉयलर फटा वहां करीब 450 लोग काम कर रहे थे।
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मजदूर ही नहीं सीनियर अधिकारी भी आये हैं बॉयलर की चपेट में
एनटीपीसी
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हिमांशु ने बताया कि घटना के बाद एकओर अफरा-तफरी मची थी, हादसे के समय हिमांशु के बहनोई को गंभीर चोटें आईं हैं। बॉयलर के फटने के बाद करीब आधे घंटे तक चारों ओर धुआं ही धुआं फैला था।
वहीं प्लांट नंबर1 में काम करने वाले राम प्रकाश को अपने दोस्त ननकू और पप्पू की चिंता है क्योंकि दोनो उसी प्लांट नंबर 6 में काम करते थे जहां बॉयलर फटा था। राम प्रकाश को अपने दोस्तों के बारे में कुछ नहीं पता चल पाया है। राम प्रकाश ने बताया ननकू का जन्मदिन था और हमलोग एक छोटी सी पार्टी करने वाले थे।
राम बदहवास सा अपने दोस्तों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में ढूंढ रहा था। उसने बताया कि मैंने बुरी तरह झुलसे हुए रोते बिलखते हुए लोगों को देखा है। मैं घटना के 15 मिनट के बाद ही एनटीपीसी पहुंच चुका था। मैंने ऐसी घटना आज तक नहीं देखी थी।
वहीं प्रत्यक्षदर्शी दिनेश कौशल ने कहा कि बॉयलर के पास काम करना हमेशा खतरनाक होता है लेकिन पापी पेट के लिए आप पता नहीं क्या-क्या करते हैं। दिनेश ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही कांट्रैक्टर को मना किया था कि वो बॉयलर के पास काम नहीं करेगा।
ऐसा नहीं कि इस हादसे में सिर्फ मजदूर जले हों बल्कि कुछ सीनियर अधिकारी भी इसकी चपेट में आए हैं। नलिन सिंह ने बताया कि मैंने तो कुछ अधिकारियों को भी मदद के लिए आवाज लगाते सुना है, मैंने उसके बाद उन्हें प्लांट से बाहर आते नहीं देखा ।