नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने स्क्रूटनी के दौरान सामने आ रही फर्जी और एआई-जनित ओएमआर शीट को लेकर सख्त रुख अपनाया है। एजेंसी ने 'एक्स' पर एडवाइजरी जारी कर साफ किया है कि जाली दस्तावेज जमा करने वाले छात्रों और अभिभावकों पर सीधा कानूनी मुकदमा चलाया जाएगा।
देश की बड़ी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है। परीक्षा सुधार के नाम पर जमा किए जा रहे दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर हेरफेर का मामला सामने आया है। इसके बाद एनटीए ने छात्रों और अभिभावकों के लिए एक बेहद जरूरी और कड़क एडवाइजरी जारी की है। एजेंसी ने साफ किया है कि समीक्षा के लिए भेजे जा रहे दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
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हाल ही में स्क्रूटनी (समीक्षा) के लिए आए कई ओएमआर शीट पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं। ये दस्तावेज आधुनिक डिजिटल टूल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तैयार किए गए थे। इस खुलासे के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी हर एक शिकायत की बारीकी से निगरानी कर रही है। एनटीए ने कड़ी चेतावनी दी है कि गलत या एआई-जनित ओएमआर शीट जमा करने पर शिकायतकर्ता को गंभीर कानूनी नतीजों का सामना करना पड़ेगा।
क्या एआई से ओएमआर बदलना पड़ेगा भारी?
एनटीए ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' पर पोस्ट साझा कर स्थिति स्पष्ट की है। एजेंसी ने कहा है कि छात्र और अभिभावक समीक्षा के लिए केवल मूल और असली ओएमआर शीट ही जमा करें। किसी भी तरह की नकली या एआई-जनित ओएमआर शीट पाए जाने पर शिकायतकर्ता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब परीक्षाओं की साख को लेकर जनता के बीच काफी चर्चाएं चल रही हैं।
क्या जालसाजों पर कसेगा कानूनी शिकंजा?
अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान कई संदिग्ध मामले पहले ही पकड़े जा चुके हैं। एजेंसी किसी भी पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में एआई इमेज जनरेशन टूल्स की पहुंच बहुत आसान हो गई है। कुछ लोग परीक्षा परिणामों को चुनौती देने के लिए इन टूल्स की मदद से फर्जी सबूत गढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों ने भी परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए एनटीए के इस फैसले का स्वागत किया है।
मामले से जुड़े पांच मुख्य बिंदु
एनटीए ने स्क्रूटनी के लिए फर्जी और एआई-जनित ओएमआर शीट जमा करने पर रोक लगाई है।
शिकायत मिलने के बाद हर एक दस्तावेज की गहन डिजिटल और प्रशासनिक जांच हो रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए छात्रों और अभिभावकों को सतर्क किया गया है।
जाली दस्तावेज पाए जाने पर शिकायतकर्ता के खिलाफ सीधे कानूनी मुकदमा चलाया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता बचाने के लिए यह कदम जरूरी था।
एजेंसी ने सभी हितधारकों से इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने में सहयोग की अपील की है। इस सख्त चेतावनी से धोखाधड़ी करने वाले तत्वों पर लगाम कसने और व्यवस्था में भरोसा बहाल होने की पूरी उम्मीद है।