केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में दो एयरफोर्स स्टेशन हैं और पाकिस्तान की सीमा के करीब होने के कारण इन्हें संवेदनशील स्टेशनों के रूप में चिन्हित किया गया है।
सीमा पार से संभावित ड्रोन हमले से सुरक्षा के लिए श्रीनगर और जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानि एनएसजी के जवानों को तैनात किया गया है। एनएसजी के डीजी एमए गणपति ने आज ये जानकारी दी।
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27 जून को हुआ था ड्रोन हमला
27 जून को जम्मू में भारतीय वायु सेना स्टेशन पर पहला ड्रोन हमला हुआ था। यहां दो मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) सीमा पार से आए और बम गिराए जिसमें दो वायुसैनिक घायल हो गए थे। बमबारी में इमारत के एक हिस्से को भी नुकसान पहुंचा था। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में दो एयरफोर्स स्टेशन हैं और ये पाकिस्तान की सीमा के करीब स्थित हैं। इन्हें संवेदनशील स्टेशनों के रूप में चिन्हित किया गया है।
एनएसजी प्रमुख ने कहा कि केंद्रीय आतंकवाद रोधी और अपहरण रोधी कमांडो बल अपने आतंकवाद विरोधी अभियानों को मजबूत कर रहा है और उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
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एम ए गणपति एनएसजी के 37वें स्थापना दिवस समारोह में बोल रहे थे जिसे 'ब्लैक कैट' भी कहा जाता है। गणपति ने कहा कि एनएसजी को श्रीनगर और जम्मू एयरपोर्ट स्टेशनों पर ड्रोन हमलों के खिलाफ सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए तैनात किया गया है और यह प्रणाली सफलतापूर्वक काम कर रही है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह तैनाती तब तक जारी रहेगी जब तक कि इन दोनों ठिकानों पर एंटी-ड्रोन हथियारों और गैजेट्स को तैनात नहीं कर दिया जाता। उन्होंने कहा कि एनएसजी के पास ड्रोन रोधी उपकरण, रडार, जैमर और ड्रोन किलर गन की एक श्रृंखला है जो बखूबी सुरक्षा का काम करती है।