इसाक-मुइवा के नेतृत्व वाली नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम या एनएससीएन (आईएम) 1997 से केंद्र सरकार के साथ बातचीत कर रही है और दोनों पक्षों ने अगस्त 2015 में एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
एनएससीएन (आईएम) ने तीन अगस्त को गैर-पूर्ति फ्रेमवर्क समझौते के विरोध में नागालैंड में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मध्यरात्रि से सभी बंद करने का आह्वान किया है। सभी सभी नगा बहुल इलाकों में 12 घंटे के बंद का ऐलान किया है।
विज्ञापन
एनएससीएन-आईएम ने एक बयान में कहा कि ऐतिहासिक ढांचा समझौता (एफए) जिस पर भारत सरकार (जीओआई) और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम (एनएससीएन) के बीच 3 अगस्त, 2015 को हस्ताक्षर किए गए थे, अभी तक इसमें आगे कोई काम होता नहीं देखा जा है।
छह साल बीत जाने के बाद भी भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। नगाओं को इस तरह से हल्के में नहीं लिया जा सकता है। नगाओं के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जा सकता।। साथ ही कहा कि बात यहीं खत्म नहीं होनी चाहिए, जो किया गया था उसे तार्किक निष्कर्ष पर ले जाना चाहिए।
विज्ञापन
इसाक-मुइवा के नेतृत्व वाली नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम या एनएससीएन (आईएम) 1997 से केंद्र सरकार के साथ बातचीत कर रही है और दोनों पक्षों ने अगस्त 2015 में एक फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए। जबकि नगा लोग फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर करके नागाओं के ऐतिहासिक और राजनीतिक अधिकारों को मान्यता देने के लिए भारत सरकार की सराहना करते हैं, बात यहीं खत्म नहीं होनी चाहिए। जो किया गया था उसे तार्किक निष्कर्ष पर ले जाना चाहिए।
नगालैंड में स्थायी शांति लाने के प्रयास जून के बाद से रुके हुए हैं क्योंकि एनएससीएन (आईएम) ने केंद्र सरकार द्वारा करों को इकट्ठा करने से रोकने के एक प्रयास का विरोध करते हुए कहा कि कर जुड़े काम सरकार का संप्रभु अधिकार है और सरकार ने नगा समूहों से करों के रूप में जबरन वसूली कर धन एकत्र किया गया धन है।
नगा समूह ने इस बात पर निराशा व्यक्त की कि केंद्र ने 3 अगस्त 2015 को हस्ताक्षरित फ्रेमवर्क समझौते में किए गए नगा शांति प्रक्रिया के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को अभी तक पूरा नहीं किया है। वहीं अब इसे लेकर एनएससीएन (आईएम) ने राज्य में 12 घंटे बंद की घोषणा की है।