नेशनल सिटीजन रजिस्ट्रर (एनआरसी) के मुद्दे पर बीते चार दिनों से सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर लगातार हमलावर है। 2019 से पहले बिखरता हुआ नजर आ रहा विपक्ष इस मुद्दे पर एक हो सकता है।
इसी कड़ी में 4 अगस्त को होने वाली कांग्रेस कार्यकारिणी समिति की बैठक में भी इस मुद्दे के छाये रहने की उम्मीद है। बैठक में एनआरसी पर व्यापक चर्चा हो सकती है।
मीडिया में जारी रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस का मानना है कि एनआरसी की सूची में उन लोगों को बाहर कर दिया गया है जो इसी राज्य में रह रहे हैं। इनमें भारी संख्यां में चाय बागान के मजदूर भी शामिल हैं। इसलिए एनआरसी का मुद्दा इस बैठक के केंद्र में हो सकता है।'
बता दें कि असम में हाल ही में जारी एनआरसी से लगभग 40 लाख लोगों के नाम हटने के बाद से सियासी भूचाल मचा हुआ है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो यहां तक कह दिया है कि इससे देश में गृहयुद्ध छिड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि एनआरसी उन्हीं राज्यों में लागू होती है जहां अन्य देश के नागरिक भारत में आ जाते हैं।
एनआरसी की रिपोर्ट ही बताती है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं। बता दें कि 1947 में जब भारत पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो कुछ लोग असम से पूर्वी पाकिस्तान चले गए, लेकिन उनकी जमीन असम में थी और लोगों का दोनों और से आना-जाना बंटवारे के बाद भी जारी रहा।