देश में पांव पसारते औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और निर्माण कार्यों के कारण लोगों के लिए जल और वायु प्रदूषण से जूझना एक गंभीर चुनौती बन चुका है। हाल-फिलहाल आने वाले वैश्विक और स्थानीय रिपोर्ट पर नजर डालें तो देश में सिर्फ महानगर ही नहीं छोटे शहर, कस्बे और गांव भी गंभीर प्रदूषण की चपेट में हैं। वहीं प्रदूषण संबंधी इन आंकड़ों और रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इन सभी समस्याओं के समाधान से निपटने की केंद्र सरकार व पर्यावरण मंत्रालय की रणनीति को लकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडे़कर से अमर उजाला के विवेक मिश्रा ने बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश :
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के ताजा वायु प्रदूषण संबंधी आंकड़ों और उन पर उठ रहे सवालों को लेकर आपकी प्रतिक्रिया क्या है?
डब्ल्यूएचओ के ताजा आंकड़ों को हम खारिज नहीं कर रहे। हालांकि, डब्ल्यूएचओ ने वायु प्रदूषण संबंधी वैश्विक रिपोर्ट में सिर्फ एक घटक (पार्टिकुलेट मैटर) को ही शामिल किया है। हमारा मानना है कि प्रदूषण के लिए कई कारक और घटक जिम्मेदार हैं। समग्र और पुख्ता स्थिति को समझने के लिए सभी घटकों को शामिल किया जाना जरूरी है।
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट को मानें तो ग्वालियर और इलाहाबाद जैसे देश के कई छोटे शहर दुनिया के शीर्ष प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हो गए हैं। केंद्र सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए क्या रणनीति बना रही है?
हम किसी विदेशी संस्था के आधार पर अपना कामकाज और नीतियां तय नहीं करते। मोदी सरकार पूरे देश में प्रदूषण से निपटने के लिए लगातार प्रभावी काम कर रही है। भारत अब इस स्थिति में है कि वह स्वयं दुनिया में सबसे प्रदूषित शहरों की सूची जारी करेगा। इस सूची में सिर्फ एक घटक (पार्टिकुलेट मैटर) ही नहीं बल्कि प्रदूषण के लिए जिम्मेदार सभी अन्य घटकों को भी शामिल किया जाएगा।
भारत की ओर से जारी होने वाली प्रदूषण संबंधी इस वैश्विक रिपोर्ट का आधार क्या होगा?
वायु प्रदूषण के लिए पार्टिकुलेट मैटर (हवा में मौजूद बारीक खतरनाक कण) के अलावा कई हानिकारक गैसें भी जिम्मेदार हैं। इनमें कॉर्बन मोनोऑक्साइड, बेंजीन, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड, ओजोन जैसे घटक अहम हैं। हर देश में इनकी स्थिति और इनका प्रभाव अलग-अलग है। हमारी ओर से जारी होने वाली प्रदूषण संबंधी वैश्विक रिपोर्ट में इन सभी घटकों को शामिल किया जाएगा। साथ ही रिपोर्ट में इस बात का भी आकलन होगा कि कौन सा देश किस प्रदूषक तत्व के कारण कितना प्रभावित है और उसकी रैंकिंग क्या है।
जलवायु परिवर्तन को लेकर वैश्विक ग्रीन फंड जुटाने के लिए भारत की अपील का क्या असर हुआ है?
पेरिस समझौते का भारत पर सकारात्मक असर दिखाई देगा। यह भारत के विकास में किसी भी तरह से बाधक नहीं बनेगा। विकासशील देशों को विकसित देशों की ओर से जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम के तहत 100 अरब डॉलर दिया जाना है। इसे जुटाने के लिए भारत ने नया रास्ता विकसित देशों को दिखाया है। मसलन भारत देश में कोयले पर छह डॉलर (400 रुपए करीब) पर्यावरणीय शुल्क लगा रहा है। इसे यदि विकसित देश भी लगाते हैं तो यह फंड आसानी से इकट्ठा हो सकता है। इस पर अभी किसी देश ने सहमति नहीं जताई है।