केंद्र में सत्ता परिवर्तन के बाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में लगातार आई नरमी-गरमी के बीच उफा में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ ने एनएसए स्तर पर संपर्क जारी रखने पर सहमति दी थी। यही कारण है कि कूटनीति गरमागरमी के चरम पर पहुंच जाने के बावजूद दोनों देशों के एनएसए लगातार एक दूसरे के संपर्क में रहे हैं। तनाव भरे वातावरण के बीच वर्ष 2015 में भी दोनों देशों के एनएसए की मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात के बाद ही पीएम मोदी अचानक बिना किसी तय कार्यक्रम के लाहौर पहुंच गए थे।
एनएसए की अगली मुलाकात पर साधी चुप्पी
प्रवक्ता ने एनएसए की मुलाकात की बात तो स्वीकारी मगर अगली मुलाकात पर चुप्पी साध ली। रविश ने कहा कि ऑपरेशनल स्तर की बातचीत के कारण ऐसी मुलाकातें पहले से घोषित नहीं की जाती।
बनते बनते बिगड़ती रही है बात
भारत-पाकिस्तान के बीच समग्र बातचीत का माहौल बनते बनते खराब होता रहा है। पीएम मोदी ने शपथग्रहण समारोह में अपने पाकिस्तानी समकक्ष नवाज को न्यौता दे कर स्थिति बदलने के संकेत दिए थे। मगर तभी पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले ने किए कराए पर पानी फेर दिया। इसके बाद विदेश सचिव स्तर की बातचीत में तत्कालीन पाकिस्तानी उच्चायुक्त बासित की कश्मीरी अलगाववादियों से बातचीत ने पानी फेरा तो इसके बाद उड़ी आतंकी हमले ने द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती के रास्ते में कांटे बिछा दिए।