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जिंदल यूनिवर्सिटी गैंगरेप केसः दोषियों को रिहा करने पर सुप्रीम कोर्ट चकित

Fri, 12 Jan 2018 04:11 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यह संकेत दिया कि सोनीपत के ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली छात्रा के साथ गैंगरेप करने के मामले में दोषी करार दिए गए दो मुख्य दोषियों को वापस जेल में होना चाहिए। न्यायमूर्ति एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि ट्रायल के दौरान वाले जेल में रहने वाले दो मुख्य आरोपियों को आखिर 20-20 वर्ष की सजा मिलने के बाद कैसे जमानत दी गई। पीठ ने इसे विरल उदाहरण बताया। 

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पीठ ने पाया कि दोषी ठहराए जाने के बाद इन दोनों को पहली बार जेल से छोड़ा गया था। पीठ ने कहा कि मात्र इस आधार पर ही हाईकोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार करना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि कानून हमें हर दिन कुछ सीखने का मौका देता है। 

गुरुवार को पीठ को जानकारी दी गई कि इस मामले में दोषी ठहराए गए तीनों छात्र जेल से बाहर है। इस पर पीठ ने कहा कि आखिर वे बाहर कैसे हो सकते हैं? हम मुख्य दोषी को जेल में वापस भेजेंगे। हालांकि पीठ ने कहा कि 18 जनवरी को उचित आदेश पारित किया जाएगा। वहीं तीसरे दोषी को पीठ ने फिलहाल राहत देते हुए अगले आदेश पर उसे गिरफ्तार न करने का निर्देश दिया है। तीसरे दोषियों को सात वर्ष की कैद की सजा मिली है। 

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निचली अदालत ने मुख्य आरोपी और उसके दोस्त को सुनवाई थी 20-20 साल की सजा

गौरतलब है कि इस मामले में निचली अदालत ने मुख्य आरोपी हार्दिक और उसके दोस्त करण को 20-20 वर्ष कैद की सजा सुनवाई थी। जबकि तीसरे आरोपी को सात वर्ष कैद की सजा सुनवाई थी। इस फैसले को तीन दोषियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। तीनों ने अपील लंबित होने की वजह से जमानत पर रिहा करने की गुहार लगाई थी। 

हाईकोर्ट ने उनकी इस गुहार को स्वीकार करते हुए उनकी सज़ा निलंबित कर दी। हालांकि हाईकोर्ट ने तीनों को देश से बाहर जाने पर रोक लगा दी थी। इसकेअलावा तीनों को मनोचिकित्सक से काउंसिलिंग कराने के लिए कहा था। तीनों के अभिभावकों को छह महीने में इस संबंध में रिपोर्ट देने के लिए कहा था। हाईकोर्ट ने तीनों की सजा निलंबित करते हुए कहा था कि वह पीड़िता की चिंता, समाज की मांग, कानून और सुधारात्मक व पुनर्वास न्याय के बीच संतुलन बनाना चाहते हैं। 

हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि पीडिता के  बयानों पर गहन विचार करने पर ऐसा लगता है ये विकृत विचार हैं।  यह भ्रमित व्यवहार व दृश्यरतिक दिमाग के वैकल्पिक निष्कर्ष की ओर इशारा करता है। करीब दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट केआदेश पर रोक लगा दी थी। लेकिन इसकेबाद अब तक तीनों को वापस हिरासत में नहीं लिया जा सका है।
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