2017 में गठित 15वें वित्त आयोग ने 2020 से 2025 तक स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को ग्रांट जारी करने की रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के दो अंश हैं।
पहला, 2020 से 2021 के लिए ग्रांट देना और दूसरे अंश में 2021-22 से लेकर 2025-26 तक की ग्रांट शामिल है। दिसंबर 2019 को ये रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंप दी गई थी।
अब वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग इस रिपोर्ट पर अमल करेगा। 28 राज्यों की अर्बन लोकल बॉडी को 90 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे। हालांकि इसके लिए राज्यों को साफ-सफाई को लेकर कई तरह की शर्तें पूरी करनी होंगी।
वित्त आयोग ने इस ग्रांट के अतिरिक्त 29250 करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान किया है। इसमें शहरों की दो श्रेणी तय की गई हैं। 50 मिलियन से अधिक जनसंख्या वाली अर्बन लोकल बॉडी (दिल्ली व श्रीनगर को छोड़कर) और दूसरा, ऐसे शहर जिनकी जनसंख्या एक मिलियन से कम है।
वित्त आयोग ने 50 मिलियन प्लस वाली अर्बन लोकल बॉडी को 2020-21 में 9229 करोड़ रुपये देने की बात कही है। इसमें 4400 करोड़ रुपये बेहतर परिवेशी वायु गुणवत्ता के लिए और 4829 करोड़ रुपये सॉलिड वेस्ट मेनेजमेंट एंड सेनिटेशन के लिए दिए जाएंगे।
परिवेशी वायु गुणवत्ता के स्तर की जांच करने की जिम्मेदारी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को दी गई है। यह मंत्रालय बतौर नोडल एजेंसी हर साल व प्रत्येक शहर के हिसाब से पीएम 10 और पीएम 2.5 की रिपोर्ट तैयार करेगा।