एक ओर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री कह रहे हैं कि अगले दो वर्ष में देश में 12 एम्स बनकर तैयार हो जाएंगे और एम्स से तैयार होने वाले चिकित्सकों को नौकरी के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं होगी। वहीं, केन्द्रीय गृहमंत्री ने कहा कि देश में प्राथमिक स्वास्थ्य क्षेत्र गौण स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने की जरूरत है। यदि इन दोनों स्तर को मजबूत किया जाए तो देश के बड़े और आधुनिक अस्पतालों में मरीजों की संख्या में 80 से 85 फीसदी की कमी आ जाएगी।
केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि देश में अगले दो वर्ष में 12 एम्स बनकर तैयार हो जाएगा। हर एम्स में कम से कम 200 फैकल्टी की आवश्यकता होगी। इस हिसाब से 2400 चिकित्सकों की जरुरत तो एम्स में ही होगी। लिहाजा आपको नौकरी के लिए अमेरिका और इंग्लैंड जाने की जरूरत नहीं है। विदेशों से जैसी सुविधा चिकित्सकों को देश में ही मिलेगी।
एम्स दीक्षांत समारोह में केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि निजी क्षेत्र के अस्पतालों में इलाज में इतना खर्च होता है कि लोग वहां जाना नहीं चाहते। लिहाजा सरकारी और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर अस्पताल खोले जाने की जरूरत है।
इशारों में गृहमंत्री ने चिकित्सकों से ग्रामीण क्षेत्र में जाकर काम करने की भी बात कही। गृहमंत्री ने कहा कि देश को स्वास्थ्य क्षेत्र में अभी बहुत काम करना है क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से बीमारियों पर एक रिपोर्ट जारी की गई है जिसमें 180 देशों की सूची में भारत 144वें स्थान पर है। मलेरिया उन्मूलन में श्रीलंका ने बाजी मार ली जबकि भारत अभी इस दिशा में बहुत पीछे है। गृहमंत्री ने कहा कि सरकार इस दिशा में काम कर रही है।