वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को आगामी एक जुलाई से देश भर में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए केंद्र सरकार ने केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी)- का नाम बदलकर केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) कर दिया है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय से शनिवार को यहां जारी एक बयान के मुताबिक सीबीईसी का नाम बदल कर सीबीआईसी करने के फैसले को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंजूरी दे दी है। सीबीईसी के तहत इस समय संगठन पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर संग्रह का जिम्मा है। लेकिन, प्रस्तावित जीएसटी के प्रावधानों को प्रभावी बनाने एवं इसे लागू करने के उद्देश्य से इसका पुनर्गठन किया गया है। सरकार केइस फैसले से पता चलता है कि वह आगामी एक जुलाई से ही जीएसटी को लागू करने के लिए प्रतिबद्घ है।
करदाता सेवाओं की पहुंच बढ़ायी जाएगी
जीएसटी
बयान के मुताबिक सीबीआईसी जीएसटी से जुड़ी नीति बनाने में सरकार को मदद करने के साथ ही इसके निदेशालयों और फील्ड स्तर पर सभी कार्यों की निगरानी करेगा। इसके साथ ही सीबीआईसी केन्द्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क के कार्यों को जारी रखेगा। सीबीआईसी के 21 जोन, 15 उप आयुक्तालयों सहित 101 जीएसटी करदाता सेवा आयुक्तालय, 768 डिवीजन, 3969 रेंज, 49 ऑडिट आयुक्तालय और 50 अपीलीय आयुक्तालय होंगे। ये सभी कार्यालय करदाता सेवाओं के लिए होंगे।
जीएसटी के लिए आईटी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए सीबीईसी के प्रणाली महानिदेशालय को भी मजबूत किया जायेगा। महानिदेशालय करदाता सेवाओं की पहुंच बढ़ायी जाएगी ताकि जीएसटी बेहतर तरह से लागू किया जा सके। अप्रत्यक्ष कर विभाग के वर्तमान प्रशिक्षण संस्थान नासेन का नाम बदलकर राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर एवं नार्कोटिक्स अकादमी किया जायेगा और इसकी राष्ट्रीय स्तर पर मौजूदगी होगी ताकि केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर प्रशासन के साथ ही राज्य सरकारों की क्षमताओं का निर्माण करने में मदद मिल सके। इसी तरह जीएसटी सतर्कता महानिदेशालय कार्यालय को भी मजबूत बनाया जायेगा ताकि वह कर चोरी और कालेधन के विरुद्ध सरकार की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा सके।