उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
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हांलाकि उत्तर प्रदेश के संत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जो खुद भी कभी मंदिर आंदोलन के अग्रणी योद्धा रहे हैं, ने साफ कह दिया कि राम मंदिर कब बनेगा यह राम जी ही तय करेंगे। योगी की इस बात पर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने मंदिर मुद्दे पर चुप्पी साध कर मुहर भी लगा दी। यानी अब 2019 के लिए भाजपा भी भगवान शंकर के भरोसे है और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तो सोमनाथ से विश्वनाथ और कैलाश तक भगवान महेश्वर की शरण ले ही चुके हैं।
हांलाकि राहुल की कैलाश मानसरोवर यात्रा को जितना प्रचार भाजपा ने दिलाया उतना शायद कांग्रेस अकेले नहीं दिला पाती। पार्टी प्रवक्ताओं से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक ने तरह तरह के सवाल उठा कर मीडिया में राहुल की कैलाश यात्रा को सुर्खिंयों में बनाए रखा। राहुल गांधी और कांग्रेस को इसके लिए भाजपा के प्रति आभार जताना चाहिए।
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भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जिस तरह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने घोषणा की कि अगर भाजपा 2019 में चुनाव जीत गई तो फिर अगले पचास साल तक वह सत्ता में रहेगी उससे लगता है कि कोई कुछ भी कहे लेकिन अमित शाह को अपनी रणनीति, मेहनत और तैयारी पर पूरा भरोसा है साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजेय भारत और अटल भाजपा का नारा देकर साफ कर दिया कि अगले लोकसभा चुनावों और उसके पहले होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा मोदी के साथ साथ अटल बिहारी वाजपेयी की लोकप्रियता को भी सियासी तौर पर भुनाने की पूरी कोशिश करेगी।
इससे एक बात तो साफ हो गई है कि भाजपा को भी यह अहसास हो गया है कि अब सिर्फ मोदी मैजिक और शाह रणनीति से ही काम नहीं चलेगा, मोदी मैजिक शाह रणनीति के साथ साथ अटल बिहारी वाजपेयी की सर्वस्वीकार्यता का कॉकटेल भी जनता को पेश करना होगा। जबकि 2014 और उसके बाद जितने भी चुनाव हुए हैं भाजपा ने सिर्फ मोदी मैजिक और अमित शाह की रणनीति और मेहनत के बूते ही सारी सफलताएं अर्जित की हैं। उसे भाजपा की तीन धरोहर रहे अटल आडवाणी मुरली मनोहर को धरोहर से बाहर लाने की जरूरत ही नहीं महसूस हुई।
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उधर चुनावी मोड में आई सरकार भले ही पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और ड़ॉलर के मुकाबले रुपए की घटती कीमत को लेकर अभी बहुत कुछ न कर पा रही हो, लेकिन उसने अपने खजाने से आम लोगों को राहत देने वाली घोषणाएं और फैसले करने शुरु कर दिए हैं।
पहले आयुष्मान योजना के जरिए 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा कवर योजना की शुरुआत, फिर आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के वेतन और मानदेय में वृद्दि और किसानों को नुकसान की भरपाई करने के लि उन्हें फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करने के लिए नई खरीद नीति को भी मंजूरी दे दी है।
इसके तहत अगर एमएसपी के मुकाबले फसल का बाजार मूल्य गिरता है तो सरकार किसानों को एमएसपी दिया जाना सुनिश्चित करेगी। जाहिर है इन लोकलुभावन फैसलों से सरकार किसानों और कमजोर वर्गों को साधकर ग्रामीण असंतोष के बन रहे माहौल को खत्म करने की कोशिश कर रही है। अब सरकार की कोशिशें और विपक्ष के हमलों के बीच जनता जनार्दन का विश्वास और भोलेनाथ का आशीर्वाद किसे मिलता है, इसके लिए इंतजार करना होगा।