भारत की धरती पर अब 3,167 बाघ दहाड़ रहे हैं। साल 2022 में हुई गणना के अनुसार 2018 की तुलना में बाघों की आबादी में 200 का इजाफा हुआ। ताजा रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रोजेक्ट टाइगर के 50 वर्ष पूरे होने पर जारी की।
1973 में जब प्रोजेक्ट टाइगर शुरू हुआ था, देश में 1,800 बाघ रह गए थे, वहीं 2006 में महज 1,411 ही बचे थे। इस लिहाज से 17 सालों में बाघों की आबादी 2.25 गुना बढ़ी।
पीएम मोदी ने इस मौके पर इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस व ‘अमृत काल का टाइगर विजन’ भी जारी किया। इसमें अगले 25 वर्ष में बाघ संरक्षण के लक्ष्य रखे गए। इससे पहले, मोदी ने बांदीपुर और मुदुमलाई टाइगर रिजर्व में 20 किमी लंबी जीप सफारी का लुत्फ उठाया।
पूरे विश्व के लिए गौरव
प्रोजेक्ट टाइगर को 50 वर्ष हो गए हैं। इसकी सफलता न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व के लिए गौरव का विषय है। भारत ने बाघों को बचाया, बेहतरीन इको-सिस्टम दिया। यह हमारे लिए और भी सुखद है कि हमने अपनी आजादी के 75 वर्ष पूरे किए, उसी समय दुनिया की 75 फीसदी बाघ आबादी भारत में है। पूरे देश को बधाई। - नरेंद्र मोदी
तब- बाघों की आबादी तेजी से घटी, तो भारत ने एक अप्रैल, 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत की। उस समय 9 टाइगर रिजर्व व 18,278 वर्ग किमी के जंगल इसमें शामिल हुए।
अब- आज 53 टाइगर रिजर्व और 75 हजार वर्ग किमी (देश का 2.4 फीसदी भूभाग) जंगलों में चल रहा है प्रोजेक्ट टाइगर। गणना में 32,588 कैमरों ने 4.70 करोड़ तस्वीरें लीं।
कई क्षेत्रों में नए बाघ
मध्य भारत में बाघों की संख्या 1033 से बढ़कर चार साल में 1,161 पर आई। महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश के कई नए क्षेत्रों में बाघ नजर आए। सुंदरबन में 100 बाघ मिले, जो 2018 में दर्ज 88 से अधिक हैं। पश्चिमी घाट में 2022 में 824 बाघ मिले।