वायरस जेनेटिक मैटेरियल से बनता है जो बहुत सूक्ष्म होते हैं। यह पूरी तरह प्रोटीन में लिपटे होते हैं या इनका बाहरी मेंब्रेन सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह हमेशा जीवित कोशिकाओं को अपना शिकार बनाता है जहां यह अपनी संख्या बढ़ाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, हर व्यक्ति आम दिनों में भी वायरस के संपर्क में आता है, लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता उसे निष्क्रिय कर देती है। खासतौर पर उन लोगों में जिन पर इसने पहले हमला किया हो या जिन्हें इसका टीका लग गया हो।
त्वचा और म्यूकस इसकी पहली सीढ़ी
पहले चरण का संक्रमण तब होता है जब वायरस, त्वचा और म्यूकस के पड़ाव को पार कर जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शरीर में प्रवेश करते ही यह सुरक्षित हो जाता है और आसानी से कोशिकाओं को अपना शिकार बनाने लगता है। कोशिकाओं को अपने कब्जे में लेने के बाद यह अपनी संख्या बढ़ाने के लिए उन पर दबाव बनाता है। इस प्रक्रिया में कोशिकाओं को नुकसान होता है तो गंभीर स्थिति में वे कोशिकाएं मर भी जाती हैं।
शरीर के कुछ खास हिस्से को बनाता है लक्ष्य
वायरस शरीर के कुछ खास हिस्से को लक्ष्य बनाता है, जहां पर उसका असर ज्यादा होता है। राइनोवायरस नाक के पीछे स्थित ऊपरी एयरवे को प्रभावित करता है, जिससे बार-बार छींक आती है। कोरोना वायरस श्वास नलिका के निचले हिस्से को प्रभावित करता है। इसका सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है और निमोनिया होने के बाद शरीर की इम्युनिटी तेजी से कम होती है। इम्युनिटी कम होने के साथ वायरस तेजी के साथ हमला बोलता है और व्यक्ति बुरी तरह उसका शिकार हो जाता है।