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नोवावैक्स: एंटीबॉडीज बनाने के साथ ही संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करता है टीका

अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 16 Jun 2021 06:20 AM IST

सार

  • वायरस के स्पाइक प्रोटीन को लॉक कर देगा नोवावैक्स का टीका, जानिए किस तरह तैयार हुआ और कैसे काम करता है देश को मिलने वाला नया टीका
  • टीके का दुष्प्रभाव- थकान, सिर और मांसपेशी में बहुत हल्का दर्द संभव है
  • टीके की कीमत-1114 रुपये एक डोज की कीमत का अभी अनुमान
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कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : पीटीआई


वायरस शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाएगा और व्यक्ति संक्रमित होने से बच जाएगा। नोवावैक्स का टीका सिर्फ एंटीबॉडीज नहीं बनाता है। टीका संक्रमित कोशिकाओं को भी मारता है जिससे वायरस शरीर में फैल नहीं पाता है। टीके की इस विशेषता से अनुमान लगाया जा रहा है कि दोबारा संक्रमण के कारण गंभीर स्थिति में जाने का भी खतरा काफी कम हो जाएगा।


नैनो पार्टिकल टेक्नोलॉजी का प्रयोग

नोवावैक्स वैक्सीन को तैयार करने के लिए नैनो पार्टिकल टेक्नोलॉजी के तहत कोरोना वायारस के जेनेटिक सीक्वेंस का इस्तेमाल किया है। वैज्ञानिकों ने कोरोना का मॉडिफाइड स्पाइक जीन तैयार करने के बाद उस जीन को बैकुलो नामक वायरस में इंजेक्ट कर दिया और संक्रमण करने के लिए छोड़ दिया। बैकुलो वायरस की कोशिकाएं जब संक्रमित हुईं तो उसने कोरोना वायरस की तरह स्पाइक प्रोटीन बनाना शुरू किया। इस तकनीक की मदद से इन्फलुएंजा और एचपीवी वैक्सीन को भी तैयार किया जाता है।


इस तरह तैयार हुआ है टीका....

एनवीएक्स-सीओवी2373 टीका तैयार करने के लिए बैकुलो वायरस की कोशिकाओं में तैयार स्पाइक प्रोटीन को निकाला और नैनो पार्टिकल के रूप में तैयार किया। नैनो पार्टिकल के अणु की संरचना कोरोना जैसी होती है लेकिन वो शरीर में अपनी संख्या नहीं बढ़ा सकता है और न ही इससे कोरोना संक्रमण का खतरा है। ऐसे में इसकी संभावना बिलकुल नहीं है कि टीका लगने से किसी को संक्त्रस्मण हो सकता है।


नैनोपार्टिकल ऐसे शुरू करेगा काम

नोवावैक्स का टीका भी अन्य टीकों की तरह हाथ में ही लगेगा। इसमें स्पाइक नैनो पार्टिकल के साथ सोपबार्क के पौधे से लिए गए एक्सट्रैक्ट का मिश्रण होगा। इंजेक्शन लगने के साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक तंत्र कोशिकाएं नैनो पार्टिकल को पहचान कर काम शुरू कर देंगी। रोग प्रतिरोधक तंत्र जिसे एंटीजन भी कहते हैं वो कोशिकाओं को वायरस से लड़ने के लिए तैयार करने में जुट जाएगा जो वायरस से लड़ सकता है।


तो ऐसे बनेगी शरीर में एंटीबॉडीज

वैज्ञानिकों के अनुसार नोवावैक्स का टीका लगने के बाद शरीर में मौजूद बी-कोशिका सक्रिय हो जाती है। इसके बाद हेल्पर कोशिका जिसे टी-सेल्स कहते हैं वो भी बी-सेल्स को सक्रिय करने का काम करती है। शरीर जैसे ही कोरोना वायरस के संपर्क में आएगा वो कोरोना के स्पाइक प्रोटीन जैसी ही एंटीबॉडीज बनाना शुरू कर देगा। शरीर में जैसे ही एंटीबॉडीज बनना शुरू होंगी वायरस कमजोर पड़ जाएगा और निष्क्रिय हो जाएगा।


फ्रीज के तापमान पर रहेगा सुरक्षित

नोवावैक्स के प्रेसिडेंट और सीईओ स्टेनली सी एर्क का कहना है कि ब्रिटेन में हुए तीसरे चरण के परीक्षण में टीका 89.3 फीसदी असरदार मिला है। यह ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में मिलने वाले कोरोना के स्ट्रेन के खिलाफ भी कारगर है। टीका 2 से 8 डिग्री सेल्सियस (फ्रीज) के तापमान पर सुरक्षित रह सकता है। तरल रूप में इस टीके को सामान्य वैक्सीन सप्लाई चेन से एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जा सकता है।
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अमेरिका और भारत को चौथी वैक्सीन

नोवावैक्स के टीके का इस्तेमाल शुरू होता है तो अमेरिका को कोरोना का चौथा असरदार टीका मिल सकता है। भारत में कोविशील्ड, कोवाक्सिन और स्पूतनिक-वी के बाद नोवावैक्स चौथा टीका होगा। नोवावैक्स का टीका फाइजर, मॉडर्ना और एक डोज वाले जॉनसन एंड जॉनसन के टीके से भी असरदार है। कंपनी के अनुसार कोरोना के नए बीटा रूप के खिलाफ भी टीका असरदार है।


टीके का प्रभाव

कंपनी के अनुसार टीका कोरोना के खिलाफ 90 फीसदी असरदार है। मॉडरेट और गंभीर तकलीफ को रोकने में 100 फीसदी कारगर है। कोरोना के सामान्य रूप पर टीका 93 फीसदी असरदार है। हाई रिस्क वाली जनंसख्या के लिए टीका 91 फीसदी जबकि वायरस के सामान्य रूप के खिलाफ 100 फीसदी असरदार है।


भारत में नोवावैक्स

देश में टीके को कोवावैक्स के नाम से जाना जाएगा। पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में इसका उत्पादन होगा। इस साल सितंबर से टीके का इस्तेमाल शुरू हो सकता है। नोवावैक्स के अनुसार सीरम इस साल टीके की 100 करोड़ डोज का उत्पादन करेगा। इस टीके को लॉन्च करने वाला भारत दुनिया का पहला देश हो सकता है। भारत में मिले कोरोना के अल्फा वैरिएंट पर भी टीका 86 फीसदी असरदार है। सीरम बच्चों पर भी इस टीके का परीक्षण शुरू कर सकता है।


नोवावैक्स के टीके का सफर...

  • 2020 जनवरी में कंपनी ने कोरोना के टीके पर काम शुरू किया
  • मई में टीके का परीक्षण शुरू किया, प्रारंभिक नतीजे संतोषजनक
  • 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर की सहायता राशि अमेरिकी सरकार ने दी
  • 2900 लोगों पर दक्षिण अफ्रीका में टीके का दूसरे चरण का परीक्षण शुरू
  • 15 हजार लोगों पर सितंबर में ब्रिटेन में कंपनी ने परीक्षण शुरू किया
  • 29,960 लोगों पर तीसरे चरण का परीक्षण अमेरिका-मेक्सिको में शुरू किया
  • 2021 मार्च में कंपनी ने दावा किया की टीका 96 फीसदी असरदार है
  • 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर भी है टीके के परीक्षण की तैयारी
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