सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र एवं निर्वाचन आयोग से सोमवार को उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें आयोग को किसी निर्वाचन क्षेत्र में नोटा के लिए सर्वाधिक मत पड़ने पर, वहां का चुनाव परिणाम अमान्य करार देने और फिर से चुनाव कराने का निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया गया है। बता दें, प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यन ने विधि एवं न्याय मंत्रालय और भारतीय निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी करके उनसे याचिका पर जवाब देने को कहा है।
वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुईं। यह याचिका वकील एवं भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की थी। याचिका में आयोग को यह भी निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि अगर नोटा (नन ऑफ द एबव यानी उपरोक्त में से कोई नहीं) पर सबसे अधिक वोट पड़ें तो उस निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव रद कर नया चुनाव कराया जाए और नए चुनाव में उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया जाए जो रद हुए चुनाव में प्रत्याशी थे। याचिका में कहा गया है कि ऐसा करने से राजनीतिक दल ईमानदार और देशभक्त उम्मीदवार को टिकट देने को बाध्य होंगे।
याचिका में कहा गया है, ‘किसी उम्मीदवार को खारिज करने और नए उम्मीदवार को चुनने का अधिकार लोगों को अपना असंतोष जाहिर करने की ताकत देगा। यदि मतदाता चुनाव में खड़े हुए उम्मीदवार की पृष्ठभूमि एवं प्रदर्शन से असंतुष्ट हैं, जो वे इस प्रकार के उम्मीदवार को खारिज करने के लिए नोटा का बटन दबाएंगे और नए उम्मीदवार को चुनेंगे।’