भारतीय रेलवे हर दिन करीब 10 हजार से अधिक पैसेंजर ट्रेनें चलाता है। इन ट्रेनों में करीब हर दिन दो करोड़ से अधिक यात्री सफर करते हैं। हालांकि, कुछ ट्रेनें ऐसी होती हैं, जिनका इस्तेमाल पैसेंजर्स सिर्फ एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए ही नहीं करते हैं, बल्कि इनका सफर भी यात्रियों के लिए काफी सुहाना होता है।
2018 में शुरू हुई थी पहली विस्टाडोम
विस्टाडोम कोच पहली बार 2018 में मुंबई-मडगांव जनशताब्दी एक्सप्रेस में मध्य रेल पर शुरू किए गए थे। यात्रियों के अच्छे प्रतिसाद के कारण, मुंबई-मडगांव रूट पर दूसरा विस्टाडोम कोच 15.09.2022 से तेजस एक्सप्रेस से जोड़ा गया था।
इन कोचों की अपार लोकप्रियता के कारण दिनांक 26.6.2021 से मुंबई-पुणे डेक्कन एक्सप्रेस में इन कोचों की शुरुआत की गई और यात्रियों की मांग को देखते हुए, मुंबई-पुणे रूट पर दो और विस्टाडोम कोच दिनांक 15.8.2021 से डेक्कन क्वीन से जोड़े गए। प्रगति एक्सप्रेस में 25.07.2022 से और साथ ही पुणे-सिकंदराबाद शताब्दी एक्सप्रेस में 10.08.2022 से एक विस्टाडोम कोच जोड़ा गया।
विस्टाडोम कोचों में कांच की छत के अलावा कई अन्य विशेषताएं हैं, जैसे चौड़ी खिड़की के शीशे, एलईडी लाइट, घूमने वाली सीटें और पुश बैक कुर्सियां, विद्युत चालित स्वचालित स्लाइडिंग कंपार्टमेंट दरवाजे, दिव्यांगों के लिए चौड़े स्लाइडिंग दरवाजे, सिरेमिक टाइल फर्श के साथ शौचालय आदि है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात, व्यूइंग गैलरी है।