शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश में जम गए हैं, थम गए हैं। अगले साल राज्य में चुनाव प्रस्तावित हैं। राज्य के बच्चों के मामा मुख्यमंत्री जनता से जुड़ने के हर तरीके अपना रहे हैं। अमरकंटक से निकली नर्मदा सेवा यात्रा उनका सबसे बड़ा अभियान है। इसको लेकर राजनीतिक हित साधने का आरोप लगाकर विपक्ष भी सीएम पर हमलावर है। इससे जुड़े तमाम मुद्दों पर सीएम शिवराज ने शशिधर पाठक से विस्तार से चर्चा की। पेश है बातचीत के अंश.....
प्रश्न: आखिर ऐसी कौन सी जड़ी बूटी है, जो आप रिझाने के लिए जनता में बांट देते हैं?
जवाब: ऐसा कुछ नहीं है। जो है जनता की सेवा है। उसे करते हैं और लगातार जन कल्याण, जन विकास के काम से जुड़े रहते हैं। मानव जीवन को सफल बनाना है तो लगता है कि और अच्छा करो...बस।
प्रश्न: आप राज्य के बच्चों के मामा भी हैं?
उत्तर: हां, अब तो बच्चों के साथ-साथ बूढ़े बुजुर्ग भी मामा कहने लगे हैं। जिधर जाओ, लोगबाग और बच्चे मामा-मामा बुलाते हैं।
प्रश्न: नर्मदा सेवा यात्रा चल रही है?
जवाब: हां, पिछले साल मई में नर्मदा नदी पर बनने वाले पुल के उद्घाटन के लिए डिडोरी जिले में गया था। वहीं विचार मन में आया और संकल्प लेकर नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से सेवा यात्रा शुरू की गई है। दरअसल, नर्मदा के बगैर मप्र की कल्पना नहीं की जा सकती। यह वैसे भी ग्लेशियर से निकली नदी तो है नहीं। पेड़ वर्षा का जल अवशोषित करके छोड़ते हैं और उस पानी से नर्मदा मईया प्रदेश के लोगों की प्यास बुझाती हैं। बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होने से नर्मदा में पानी का स्तर घट रहा था, इसलिए इस अभियान को शुरू किया गया है। इसमें पौधरोपण के साथ-साथ तमाम अभियान शामिल हैं। यह अब तक सबसे बड़ा सामाजिक अभियान है। नर्मदा सेवा यात्रा के माध्यम से सरकार न केवल नर्मदा नदी का विकास कर रही है, बल्कि आम लोगों के सहयोग से कई संकल्प ले रही है। पर्यावरण-प्रदूषण, नदी स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले समय में नर्मदा में घरों का दूषित जल नहीं गिरेगा। सरकार इस गंदे पानी को ट्रीटमेंट प्लांट में शोधन कराकर उसे किसानों को सिंचाई के लिए उपलब्ध कराएगी। पूरी नर्मदा नदी के किनारे फलदार वृक्ष लगेंगे। नर्मदा के घाटों और ओंकारेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार होगा। इसी अभियान से नशा मुक्ति अभियान, बेटी बचाओ , हर गांव में बेटा-बेटी को पढ़ाने की योजना का संकल्प लिया है। ओंकारेश्वर, ममलेश्वर और ब्रह्मपुरी, विष्णुपुरी के तीनों मंदिरों को जोड़ने, ओंकारेश्वर में जगद्गुरु शंकराचार्य की धातु की प्रतिमा, उनकी गुफा का पुनरुद्धार, संग्रहालय बनाने, पाठ्यपुस्तकों में जगद्गुरु पर पाठ पढ़ाने, संत समाज के मार्गदर्शन में वेदांत संस्थान आदि की स्थापना का निर्णय लिया गया है।
प्रश्न: क्या माना जाए कि नर्मदा यात्रा के माध्यम से शिवराज सिंह गांव-गांव और लोगों से जुड़ना चाह रहे हैं?
उत्तर: मैं तो पहले से ही लोगों से जुड़ा हूं। गांव-गांव में लोगों के साथ जुड़े हैं। आप चाहें तो जाकर पता कर लें।
प्रश्न: कई काम ऐसे हैं जो सरकार के नहीं लगते। जहां धर्म का काम है, वहां भी सरकार? कहीं धर्म राजनीति का माध्यम तो नहीं बन रहा है?
उत्तर: नर्मदा सेवा यात्रा बहुउद्देश्यीय जरूर है लेकिन इसका यह आशय नहीं है। मेरा मानना है कि सरकार का काम केवल सड़क, बिजली, पानी, अस्पताल बनाना ही नहीं है। सरकार का काम सामाजिक अभियानों को दिशा देना भी है। लोगों में जागरूकता फैलाना और उनके साथ जुड़ना भी है। जब तक सरकार की योजना को लोगों का सहयोग नहीं मिलता तब तक शासन की योजना सफल नहीं हो सकती। इसलिए लोगों के सहयोग से इस यात्रा के उद्देश्य को पूरा करने का संकल्प लिया गया है। मैं इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा हूं। जैसे बेटी बचाओ योजना मैंने मुख्यमंत्री बनने के एक साल बाद ही शुरू कर दी थी।