18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को मंगलवार यानी 27 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होना है। सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक अधिकारियों को पेंशन बकाया और सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान पर दूसरे राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग (एसएनजेपीसी) की सिफारिशों को लागू न करने के लिए उन्हें तलब किया है।
इन राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव होंगे पेश
जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव 27 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में पेश होंगे। इनमें हरियाणा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, असम, नगालैंड, मेघालय, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, बिहार, केरल, गोवा और ओडिशा शामिल हैं।
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की सख्त टिप्पणी
सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ की याचिका और 22 अन्य याचिकाओं को मंगलवार को सुबह 10:30 बजे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। इस पर सीजेआई ने 22 अगस्त को कहा, मैं देख सकता हूं कि कोई ठोस अनुपालन नहीं हुआ है। उन्हें व्यक्तिगत रूप से हमारे सामने पेश होना होगा या हम उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी करेंगे।
एसएनजेपीसी की सिफारिशों को न लागू करने पर निर्देश
सुप्रीम कोर्ट का ये निर्देश तब आया जब वरिष्ठ वकील के परमेश्वर, जो अदालत में एमिकस क्यूरी (अदालत के मित्र) के रूप में सहायता कर रहे हैं, ने पीठ को बताया कि कई आदेशों और समय के विस्तार के बावजूद,18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) ने एसएनजेपीसी की सिफारिशों का पूरी तरह से पालन नहीं किया है। अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ (एआईजेए) पूर्व न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों के लिए कल्याण और अन्य उपायों के कार्यान्वयन की मांग कर रहा है।
राज्यों को और विस्तार नहीं देगी सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने कहा कि शीर्ष नौकरशाहों को देरी के लिए व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा और कई राज्यों के अनुरोध को खारिज कर दिया कि मुख्य सचिवों को वर्चुअल रूप से पेश होने की अनुमति दी जाए। 11 जुलाई को पीठ ने एसएनजेपीसी की सिफारिशों का पालन न करने पर 23 राज्यों के मुख्य सचिवों को 23 अगस्त को तलब किया था। इस मामले में न्यायमित्र ने अदालत को बताया कि इस बीच पांच और राज्यों ने निर्देशों का पालन किया है। चूंकि सीजेआई की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ 23 अगस्त को उपलब्ध नहीं थी, इसलिए अधिकारियों को अब 27 अगस्त को पेश होना होगा। इस मामले में पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वह राज्यों को और कोई विस्तार नहीं देगी।
'सेवा शर्तों में एकरूपता बनाए रखने की जरूरत'
10 जनवरी को शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि देश भर में न्यायिक अधिकारियों की सेवा शर्तों में एकरूपता बनाए रखने की आवश्यकता है। न्यायिक अधिकारियों के वेतन, पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों पर एसएनजेपीसी की सिफारिशों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए प्रत्येक उच्च न्यायालय में दो न्यायाधीशों की समिति गठित करने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि हालांकि अन्य सेवाओं के अधिकारियों ने 1 जनवरी, 2016 को अपनी सेवा की शर्तों में संशोधन का लाभ उठाया है, लेकिन न्यायिक अधिकारियों से संबंधित इसी तरह के मुद्दे आठ साल बाद भी अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
पीठ ने कहा कि कई न्यायाधीश सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और जो लोग मर चुके हैं उनके परिवार के पेंशनभोगी भी समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। एसएनजेपीसी की सिफारिशों में वेतन संरचना, पेंशन और पारिवारिक पेंशन और भत्ते शामिल हैं। आयोग ने जिला न्यायपालिका की सेवा शर्तों के विषयों को निर्धारित करने के लिए एक स्थायी तंत्र स्थापित करने के मुद्दे पर भी विचार किया है।