जलस्तर अच्छा होने से नहीं होती है पानी की किल्लत
सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड में एक गांव ऐसा भी है, जहां न पानी की किल्लत है और न ही बिजली की। मूलभूत सुविधाओं से लैस इस गांव की खुशहाली गांव वालों की पहल और उनकी मेहनत की देन है।
फरवरी 2009 में ग्रामीण विद्युतीकरण पर काम कर रही नार्वे की स्काटेक सोलर एवं वित्तीय भारत ने बड़ागांव ब्लॉक के रमपुरा गांव में पचास लाख रुपये की लागत से 8.7 किलोवॉट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र (सोलर मिनी ग्रिड पॉवर प्लांट) लगाया था। इससे पहले गांव में बिजली नहीं थी। तभी से इस सोलर प्लांट की बदौलत गांव के 75 घर रोशन हो रहे हैं।
हालांकि तीन महीने पहले गांव में बिजली के तार जरूर खिंच गए, लेकिन लोगों ने सोलर लाइट के अपने कनेक्शन नहीं हटाए हैं। सोलर प्लांट से चार रुपये की दर से 20 से 22 घंटे बिजली मिल जाती है। जबकि बिजली महकमे की आपूर्ति चौदह से सोलह घंटे ही मिल पाती है।
गांव में पानी की कोई समस्या नहीं। यहां तीन सरकारी हैंडपंप हैं, मगर अधिकांश घरों में बोरिंग करके ही हैंडपंप लगे हैं। गांव के पास से सिमरधा नहर निकली है, जिसका पानी खेतों तक नहीं पहुंचता है। जल संरक्षण के लिए लोगों ने खेत पर कुएं खुदवा रखे हैं। इसका नतीजा यह है कि भूजल का स्तर सामान्य बना रहता है।