उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि आपातकाल देश के इतिहास का हिस्सा है। इससे झुठलाया नहीं जा सकता। नई पीढ़ी को इसकी जानकारी देने के लिए आपातकाल को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। कोई भी किसी के भी विचारों से असहमत हो सकता है। इसके बाद भी लोगों को एक-दूसरे का सम्मान करना सीखना चाहिए। भारतीय मूल्यों में असहिष्णुता की कोई जगह नहीं है।
उन्होंने कहा कि देश के किसी नागरिक की आजादी का हनन करने वाले को खुद को भारतीय कहने का कोई अधिकार नहीं है। इस दौरान उन्होंने प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्य प्रकाश की किताब ‘इमरजेंसी : इंडियन डेमोक्रेसीज डार्केस्ट अवर’ के हिंदी, कन्नड़, तेलुगु और गुजराती संस्करण का विमोचन भी किया।
उन्होंने कहा कि दोबारा कभी कोई समझदार सरकार आपातकाल लागू नहीं करेगी। व्यक्तिगत स्वतंत्रता अब कुछ गुमराह नागरिकों के कारण खतरे में है। लव जिहाद और गौ रक्षा के नाम पर असहिष्णुता के बढ़ते स्तर पर उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी नागरिक को भारतीय नहीं कहा जाएगा जो किसी सह नागरिक की
स्वंत्रता का उल्लंघन करे।
नायडू ने आगे कहा कि भारतीय मूल्यों और आचारों में असहिष्णुता के लिए कोई जगह नहीं है। बहुलवाद ही हमारे दृष्टिकोण में शामिल है। भारत ने उन सभी लोगों को जगह दी है जो आक्रमण और लूटपाट समेत अन्य कारणों से यहां आए हैं।
नायडू ने युवाओं को गौ अतिसतर्कता और धर्म के नाम पर होने वाली असहिष्णुता से आगाह रहने को कहा। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से ही इस बात का अहसास होता है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का पूरा आनंद एक नागरिक तभी ले सकता है जब वह अन्य नागरिकों की स्वतंत्रता का सम्मान करे।