संसद के शीतकालीन सत्र में नोटबंदी पर रोज-रोज के हंगामे से लोकसभा के वरिष्ठतम सदस्य लालकृष्ण आडवाणी का सब्र का बांध आखिरकार टूट ही गया। शून्यकाल में हंगामे के बीच स्पीकर ने कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा करते ही आडवाणी एकाएक फट पड़े। उन्होंने कहा विपक्ष सदन नहीं चलने दे रहा और संसदीय कार्य मंत्री-स्पीकर भी सदन नहीं चला पा रहे हैं। हंगामा करने वालों को बाहर करने के अलावा इनका वेतन काट लिया जाना चाहिए।
इतना ही नहीं गुस्से से भरे आडवाणी ने यह भी कहा कि वह स्पीकर से कहने जा रहे हैं कि वह सदन नहीं चला रही हैं। ऐसा मैं सार्वजनिक तौर पर भी कहने जा रहा हूं। आडवाणी के उग्र रूप से विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष भी सन्न रह गया।
दरअसल बुधवार को भी नोटबंदी के सवाल पर विपक्ष के उग्र सदस्य वेल में नारेबाजी कर रहे थे। इस कारण थोड़ी ही देर बाद सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाही जब दोबारा शुरू हुई, तो हंगामे और नारेबाजी के बीच ही स्पीकर ने शून्यकाल जारी रखा।
हंगामा बढ़ाने पर जैसे ही उन्होंने दोपहर दो बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा की गई, आगे की पंक्ति में बैठे आडवाणी अचानक बेहद नाराज हो गए। उन्होंने एक अधिकारी से स्थगन के समय की जानकारी ली। जब उन्हें बताया गया कि कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित हुई है तो उन्होंने नाराजगी में कहा अनिश्चितकाल के लिए क्यों नहीं हुई?
इसी दौरान संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने आडवाणी का ध्यान मीडिया गैलरी की तरफ खींचा और यह बताने की कोशिश की कि मीडिया के लोग उनकी बात सुन रहे हैं। मगर आडवाणी नहीं रुके और खड़े हो कर नाराजगी जताते रहे।