गुजरात कैडर के अफसर राकेश अस्थाना की कार्यकारी सीबीआई प्रमुख के तौर पर नियुक्ति आलोचनाओं का शिकार हो गई है। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति को लेकर पीएम मोदी को सख्त लहजे में खत लिखा है।
1 - खड़गे ने प्रधानमंत्री को खत में लिखा है कि अस्थाना कि नियुक्ति में जो प्रक्रिया अपनाई गई है वह तय नियमों के अनुरूप नहीं है।
2 - आईपीएस 1984 बैच के राकेश अस्थाना सरकार की पहली पसंद हैं। ये सीबीआई चीफ अनिल सिन्हा के रिटायरमेंट के बाद खाली हुए पद पर नियुक्ति के लिए काफी जूनियर हैं।
चयन समिति की जरूरत को किया गया खत्म
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3 - पत्र में आरोप लगाया गया है कि अंतरिम चीफ के तौर अस्थाना की नियुक्ति के लिए सरकार ने चयन समिति बनाने की जरूरत को खत्म कर दिया। बल्कि उन्हें इस बात का अवसर भी दे दिया गया कि वो अगले साल तक सीबीआई प्रमुख के पद के पैनल में शामिल होने के लिए योग्यता हासिल कर लें।
4 - वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति करने वाली निर्णायक समिति प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, और प्रमुख विपक्षी दल के नेता से मिलकर बनती है, लेकिन इस नियुक्ति में ऐसा नहीं किया गया। जिसमें प्रमुख अपने जूनियर को कार्यभार सौंपता है।
5 - प्रधानमंत्री को लिखे गए इस खत में खड़गे ने संदर्भ देते हुए कहा है कि आरके दत्ता का अचानक स्थानांतरण कर दिया गया। वो अगले साल उन लोगों की सूची में शामिल थे जिन्हें सीबीआई चीफ बनाया जा सकता था। ये सिन्हा के रिटायर होने से तीन दिन पहले किया गया।
सीबीआई से हटाए गए वरिष्ठ अफसर
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6 - आरके दत्ता की नियुक्ति गृहमंत्रालय के अंदर एक विशेष पद बनाकर की गई है। दत्ता दो हाईप्रोफाइल भ्रष्टाचार के केसों की जांच कर रहे थे, जिसमें कोल और टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला शामिल है।
7 - नौकरशाहों के बीच ये चीज आश्चर्य की वजह बन गई है कि दत्ता का ट्रांसफर सुप्रीम कोर्ट के उस ऑर्डर को दरकिनार करके किया गया है, जिसमें कहा गया है कि अगर कोई अफसर दो केसों की जांच कर रहा है तो उसे हटाया नहीं जा सकता।
8 - सरकारी सूत्र तर्क देते हैं कि दत्ता जांच अधिकारी नहीं थे बल्कि वे इन केसों के निरीक्षक के रूप में काम कर रहे थे, जिस वजह से उनके हटाने से इन केसों की जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
सीबीआई के इतिहास में पहली बार नहीं है नियमित प्रमुख
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9 - नियुक्ति का ये विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गया है। वकील और कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने नियुक्ति को चुनौती देते हुए एक याचिका दाखिल की है, जिस पर कोर्ट सुनवाई करेगा। इस याचिका में चयन समिति की बैठक न बुलाए जाने पर कई सवाल खड़े किए गए हैं।
10 - दस सालों में ये पहली बार और सीबीआई के इतिहास में दूसरी बार है कि इस एजेंसी के पास कोई नियमित प्रमुख नहीं है।