अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने से नरेंद्र मोदी की चार साल पुरानी सरकार को भले ही कोई डर नहीं रहा हो, लेकिन इसने सभी राजनीतिक दलों को 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए खुद को कमर कसने का एक मौका जरूर दे दिया। सवाल यह है कि विभिन्न राजनीतिक पार्टियों की अविश्वास प्रस्ताव के मतदान से क्या हासिल करने की मंशा थी। पेश है एक विश्लेषण।
कांग्रेस
यह जानते हुए भी कि यह निश्चित था कि अविश्वास प्रस्ताव के नतीजे खिलाफ ही होंगे, कांग्रेस का एकमात्र लक्ष्य अविश्वास प्रस्ताव के साथ सरकार पर हमला करना था और राहुल गांधी को एक सक्षम नेता के रूप में पेश करना था। पार्टी ऊंचे मनोबल के साथ उभरी और उसने इस बात से आश्वस्त किया कि, राहुल गांधी ने अपने आत्मविश्वास से भरे आक्रामक भाषण और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को गले लगाकर, आकर्षण का केंद्र बन गए। हालांकि पार्टी के लिए अब यह चुनौती है कि इस फायदे को चुनावी जीत में कैसे बदले।