कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सेवानिवृत्ति के एक मामले में बड़ा फैसला लिया है। उच्च न्यायालय ने कहा है कि एक कर्मचारी सेवानिवृत्त होने के बाद दर्ज की गई जन्मतिथि को नहीं बदल सकता। आइए जानते हैं कि यह मामला क्या है। यह मामला एक कर्मचारी से जुड़ा है, जो एक विनिर्माण इकाई में काम करते थे। कर्मचारी ने कंपनी में वर्ष 1983 से अपनी सवानिवृत्ति होने तक वर्ष 2006 तक काम किया। जब कर्मचारी को कंपनी में नियुक्ति मिली थी, उन्होंने 20 मार्च वर्ष 1952 को अपनी जन्मतिथि बताई थी। हालांकि, उन्होंने अपनी जन्मतिथि को लेकर कोई सबूत नहीं दिया था।
सेवानिवृत्ति के बाद दिया ये तर्क
उधर, नियोक्ता ने कर्मचारी के स्कूल प्रमाण पत्र और प्रोविडेंट फंड से मिली जानकारी के आधार पर कर्मचारी की जन्मतिथि 10 मार्च 1948 दर्ज की। इस मतलब यह हुआ को कर्मचारी को वर्ष 206 में 58 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति मिली। अपनी सेवानिवृत्ति के बाद व्यक्ति को अपना जन्म प्रमाण पत्र मिला, जिसमें जन्मतिथि 30 मार्च 1952 दर्ज थी। इसके बाद उन्होंने तर्क दिया कि उनको चार वर्ष बाद सेवानिवृत्त होना था।
कर्नाटक उच्च न्यायालय में दाखिल की याचिका
उधर, नियोक्ता ने कर्मचारी के इस आवेदन को स्वीकार नहीं किया। नियोक्ता ने तर्क दिया कि कंपनी में कर्मचारी की दर्ज की गई जन्मतिथि सही थी। नियोक्ता ने यह तर्क भी दिया कि कर्मचारी द्वारा पहले ही बिना कोई सवाल किए हुए सेवानिवृत्ति को स्वीकार कर लिया गया था। इसके बाद सेवानिवृत्त कर्मचारी द्वारा इस मामले को निचली अदालत में ले जाया गया, जहां उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया। आखिरकार, कर्मचारी ने कर्नाटक उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति एम. जी. एस. कमल ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि व्यक्ति ने सेवानिवृत्त होने के दो वर्ष बाद याचिका दाखिल की है, जिससे याचिकाकर्ता के दावे पर शक होता है।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जिक्र किया
सुनवाई के दौरान अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि सेवानिवृत्त होने के बाद जन्मतिथि को नहीं बदला जा सकता। उच्च न्यायालय ने कहा कि कर्मचारी के पास पहल भी अपनी जन्मतिथि बदलने का मौका था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उच्च न्यायालय ने कहा कि प्रोविडेंट फंड और स्कूल के प्रमाण पत्रों में दर्ज की गई जन्मतिथि सही है। अदालत ने यह भी कहा कि सेवानिवृत्त व्यक्ति ने अनुचित लाभ पाने के लिए यह दावा पेश किया है। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी अपनी जन्मतिथि नही बदल सकते।