राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने देश के सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और प्राचार्यों को चिकित्सा उपकरणों से संबंधित प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी, आकलन और रोकथाम के लिए समितियां गठित करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, एनएमसी ने यह भी निर्देश दिया है कि वे अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर हर कोर्स की पूरी फीस और इंटर्न व जूनियर और सीनियर रेजिडेंट को मिलने वाले वजीफे का विवरण प्रकाशित करें।
एक सार्वजनिक सूचना में, एनएमसी ने कहा है कि प्रत्येक चिकित्सा संस्थान को गठित की जाने वाली समितियों को भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) के साथ पंजीकृत करनी होंगी। एनएमसी ने इस बात पर जोर दिया कि आज के समय में चिकित्सा उपकरण स्वास्थ्य सेवाओं का जरूरी हिस्सा हैं, जो बीमारियों की पहचान, इलाज और देखभाल में अहम भूमिका निभाते हैं।
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एनएमसी ने उपकरणों से नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं का हवाला दिया
चिकित्सा उपकरणों द्वारा मरीजों को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं का हवाला देते हुए, आयोग ने ऐसी घटनाओं की निगरानी और पुनरावृत्ति को रोकने के लिए एक मजबूत व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया। इसके जवाब में, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 2015 में भारतीय मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (एमवीपीआई) शुरू किया था। इसका उद्देश्य देशभर में चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी प्रतिकूल घटनाओं और खतरों की निगरानी करना था।
एमवीपीआई का उद्देश्य घटनाओं की जानकारी एकत्र कर विश्लेषण करना
एनएमसी ने कहा कि एमवीपीआई की राष्ट्रीय पहल का उद्देश्य ऐसी घटनाओं की जानकारी व्यवस्थित रूप से एकत्र करना, उनका विश्लेषण करना और उन पर प्रतिक्रिया देना है, जिससे बेहतर रोगी सुरक्षा सुनिश्चित हो और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने को बढ़ावा मिले। आईपीसी द्वारा समन्वित, यह कार्यक्रम अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्थापित चिकित्सा उपकरण प्रतिकूल घटना निगरानी केंद्रों (एमडीएमसी) के बढ़ते नेटवर्क के माध्यम से संचालित होता है।
समिति में शामिल सदस्यों-संयोजकों का नाम वेबसाइट पर डालें
एनएमसी ने कॉलेजों से कहा है कि वे समिति में शामिल संयोजक और सदस्यों का नाम अपनी वेबसाइट पर डालें। सामान्यतः अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक इस समिति के अध्यक्ष होंगे। कॉलेजों को यह भी याद दिलाया गया है कि वे अपनी वेबसाइट पर फार्माकोविजिलेंस समिति की जानकारी अपडेट करें और 31 जुलाई तक इस समिति का रजिस्ट्रेशन पूरा कर लें।
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वेबसाइट पर विवरण प्रकाशित न करने पर होगी सख्त कार्रवाई
इसके अलावा, एनएमसी ने कॉलेजों को अपनी वेबसाइटों पर हर कोर्स की पूरी फीस और इंटर्न व जूनियर और सीनियर रेजिडेंट को मिलने वाले वजीफे का विवरण प्रकाशित करने का भी निर्देश दिया है। एनएमसी ने एक नोटिस जारी करके कहा है कि अगर किसी कॉलेज ने ऐसा नहीं किया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें कारण बताओ नोटिस, जुर्माना, कोर्स की मान्यता रद्द करना और नए एडमिशन रोकना शामिल है।
एनएमसी ने सार्वजनिक सूचना में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
सार्वजनिक सूचना में यह भी उल्लेख किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 29 अप्रैल, 2025 को एक फैसले में कहा है कि सभी निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों को प्री-काउंसलिंग चरण में ट्यूशन फीस, छात्रावास शुल्क, जमानत राशि और सभी विविध शुल्कों के बारे में विस्तृत जानकारी का खुलासा करना होगा। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने एक और केस में कॉलेजों द्वारा वजीफा न देने और इंटर्नशिप के दौरान जबरन फीस वसूलने पर भी चिंता जताई है और इस पर अंतरिम निर्देश दिए हैं। इस पर एनएमसी ने कहा है कि छात्रों के साथ किसी भी तरह की छिपी या मनमानी फीस वसूली न हो, और उन्हें समय पर वजीफा मिले, इसके लिए वह कई कदम उठा रही है।