नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि मौजूदा बजट में सभी का ध्यान रखा गया है। इसके बावजूद शेयर बाजार गिरने पर वे हतप्रभ हैं, समझ नहीं पा रहे कि ऐसा क्यों हुआ? शायद निवेशकों को बड़े सुधारों की उम्मीद थी। वे लेहमन ब्रदर्स संकट के बाद और चुनाव के पहले आए 2008 जैसे बजट की आस लगाए थे, जो संभव नहीं है।
राजीव कुमार ने दावा किया कि बजट में कई घोषणाओं से घरेलू व विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य 2024-25 तक अब भी संभव है। यह मानने की कोई वजह नहीं है कि अगले पांच वर्ष में हम इसे हासिल नहीं कर पाएंगे। केवल रुपये का मूल्य अचानक गिरना ही इसकी राह में बाधा है। वित्तवर्ष 2020-21 में वृद्धि दर छह से साढ़े छह प्रतिशत और अगले चार वर्ष में यह सात से आठ प्रतिशत रहती है तो यह लक्ष्य अव्यवहारिक नहीं है।
उन्होंने कहा कि कारोबारी प्रतिबंध कई बार बूमरैंग जैसे बन जाते हैं, इन्हें जितने कम समय के लिए रखें, उतना ही बेहतर है। कई उत्पादों पर बढ़ाए आयात कर के संदर्भ में राजीव कुमार ने कहा कि चीनी उत्पादों के आयात से संकटग्रस्त भारतीय उद्योगों को राहत देने के लिए किया गया यह उपाय तात्कालिक है। उम्मीद है कि उद्योग और सरकार उचित प्रयास करेंगे और घरेलू उद्योग अपने बल पर चीनी आयात का मुकाबला करने के काबिल हो जाएंगे।