डीजीपी ने कहा, मुख्य आरोपी मोहम्मद शरीक का मकसद समुदायों के बीच विभाजन पैदा करना था। इसमें कोई संदेह नहीं है। इसका मकसद हिंदू, मुस्लिम या ईसाई समुदायों के बीच मतभेद बढ़ाना था। मतलब देश को अस्थिर करना था।
मंगलूरू ऑटोरिक्शा विस्फोट मामले को लेकर पुलिस ने बुधवार को कहा कि मुख्य आरोपी मोहम्मद शरीक ने अंडरग्राउड होने पर अपनी असली पहचान छिपाने के लिए खुद को एक हिंदू के रूप में पेश किया। उधर, राज्य के डीजीपी प्रवीण सूद ने बुधवार को बताया कि मामले को जल्द ही औपचारिक रूप से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दिया जाएगा।
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डीजीपी ने कहा, मुख्य आरोपी मोहम्मद शरीक का मकसद समुदायों के बीच विभाजन पैदा करना था। इसमें कोई संदेह नहीं है। इसका मकसद हिंदू, मुस्लिम या ईसाई समुदायों के बीच मतभेद बढ़ाना था। मतलब देश को अस्थिर करना था। उनका निश्चित तौर पर सांप्रदायिक सौहार्द और एकता को बिगाड़ने का इरादा था।
कर्नाटक के गृहमंत्री अरागा जनानेंद्र ने डीजीपी सूद के साथ विस्फोट स्थल का दौरा किया। उन्होंने उस अस्पताल का भी दौरा किया जहां ऑटो चालक पुरुषोत्तम पुजारा का इलाज चल रहा है। जनानेंद्र ने कहा, एनआईए और अन्य केंद्रीय एजेंसियां विस्फोट से पहले दिन से ही कर्नाटक पुलिस के साथ मिलकर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मामला औपचारिक रूप से एनआईए को सौंपा जाएगा।
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मंगलूरू में एनआईए के एक कार्यालय को स्थापित करने की मांग को लेकर जनानेंद्र ने कहा, राज्य सरकार ने इसे केंद्र के संज्ञान में लाया है और भरोसा जताया है कि इस तटीय शहर में एक कार्यालय स्थापित किया जाएगा।
कर्नाटक के शिवमोगा जिले के तीर्थहल्ली के रहने वाले एक ऑटोरिक्शा चालक के वाहन में प्रेशर कुकर रखा गया था। इसमें डेटोनेटर, तार और बैटरी लगी हुई थी, 19 नवंबर को विस्फोट हुआ था।