राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के डीएसपी तंजील अहमद की हत्या के तार पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से जुड़ रहे हैं। पठानकोट में आतंकी हमले की जांच करने आए पाकिस्तानी दल से बातचीत और उनके दस्तावेजों के अध्ययन में तंजील भारतीय जांच दल की महत्वपूर्ण कड़ी थे।
पाक दल को पठानकोट हमले के भारतीय प्रमाण देने और उन्हें जांच के हर पहलू को समझाने में वह भारत का पक्ष सामने रख रहे थे। तंजील हत्याकांड की जांच से जुड़े सूत्र यह मान रहे हैं कि अपनी इसी अहम भूमिका के कारण वह आतंकियों के निशाने पर आ गए थे।
उत्तर प्रदेश में तंजील अहमद एनआईए के अकेले ऐसे अफसर थे, जिन्होंने आतंकियों पर बड़ा रिसर्च किया हुआ था। तंजील की उर्दू, फारसी समेत कई भाषाओं पर अच्छी पकड़ थी। आतंकियों से संबंधित पाकिस्तान की रिपोर्ट का तंजील अध्ययन करते थे और उसके बाद एनआईए टीम के अफसर जवाब बनाकर सरकार को सौंपते थे।
इसकी जानकारी पाक दल को भी मिल गई थी। पिछले हफ्ते पठानकोट हमले की जांच करने आए पाक दल के समक्ष आतंकी हमले व एनआईटी द्वारा एकत्र सुबूतों को तंजील ने ही पाकिस्तानी टीम के सामने रखा था। मुस्लिम होने के चलते एनआईए की टीम ने तंजील को पाकिस्तान टीम के साथ लगाया। इस दौरान तंजील ने पाक आतंकियों की पोल भी खोली थी।
लंच से डिनर तक साथ रहे तंजील
पाक दल के खाने-पीने की व्यवस्था भी तंजील अहमद ने कराई थी। लंच से डिनर तक तंजील ऐसे अफसर थे, जो पाक टीम के साथ रहे। पाक दल ने तंजील से आतंकियों की जानकारी ली। इस दौरान पाक दल यह जान चुका था कि तंजील ने आतंकियों पर बहुत काम किया हुआ है। तंजील यूपी में अकेले अफसर थे जो बिजनौर और सहारनपुर समेत कई जिलों में काम कर रहे थे।
तीन दिन से तंजील की हो रही थी रेकी
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि तंजील की तीन दिन से रेकी हो रही थी। हमलावरों को इस बात की जानकारी थी कि बिजनौर में तंजील का आना-जाना सबसे ज्यादा था। भांजी के निकाह में तंजील के आने की सूचना के बाद हमलावरों ने बिजनौर में उन पर हमले का प्लान बनाया। सूत्रों की मानें तो लोकल शार्प शूटरों को हायर किया गया होगा और उन्हें हथियारों का सपोर्ट दिया गया। जांच से जुड़े अफसरों का दावा है कि तंजील की हत्या का खुलासा 72 घंटे में कर देंगे।
सिमी आतंकियों पर किया बड़ा वर्क
तंजील वेस्ट यूपी में एनआईए के एकमात्र मुस्लिम अफसर थे। सिमी आतंकियों पर तंजील ने बहुत वर्क किया हुआ था। यूपी में सिमी आतंकियों से जुड़े खुलासे में तंजील की भूमिका सबसे अहम रही। बिजनौर के मोहल्ला जाटान में 12 सितंबर 2014 को लीलो देवी के मकान में बम बनाते समय विस्फोट हुआ था।
इसके बाद फरार आतंकियों की पहचान मध्यप्रदेश की खंडवा जेल से फरार आतंकी एजाजुद्दीन, असलम, अकरम, महबूब, सालिक और जाकिर हुसैन के रूप में हुई थी। सबसे पहले इसका खुलासा तंजील ने ही किया था। आतंकियों ने वेस्ट यूपी में स्लीपिंग मॉड्यूल भी तैयार कर रखे थे।
दो और एनआईए अफसर आने थे शादी में
सूत्रों के मुताबिक, बिजनौर हमले में टारगेट बड़ा था। सिर्फ तंजील ही नहीं, बल्कि कुछ और अफसरों को निशाना बनाने का प्लान था। तंजील की भांजी के निकाह में एनआईए के दो और अफसरों को शामिल होना था। यह जानकारी भी संभवत: हत्यारों को थी। लेकिन, किसी कारण वश दोनों अफसर शादी में शामिल नहीं हो सके।
अत्याधुनिक हथियार से हुआ हमला?
तंजील की हत्या में अत्याधुनिक हथियारों के इस्तेमाल की बात सामने आ रही है। जांच से जुड़े अफसरों का दावा है कि भाड़े के शूटरों को अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध कराए गए, ताकि तंजील को मारने में चूक न हो जाए।
इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि तंजील की हत्या आतंकियों ने कराई। मौके से बरामद चार खोखे, पोस्टमार्टम में तंजील के शरीर से बरामद छर्रों को जांच के लिये फोरेंसिक लैब दिल्ली भेजा गया है। इससे यह खुलासा हो सकेगा कि हत्यारों ने वारदात में किस हथियार का इस्तेमाल किया। इन बिंदुओं पर एसटीएफ, एटीएस और एनआईए की टीम भी जांच में लगी है।