राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को 220 मोस्ट वांटेड की तलाश है। इनमें से 80 आतंकी ऐसे हैं, जिनका नाम तो है, मगर एजेंसी के पास उनकी तस्वीर नहीं है। इनमें कई आतंकियों की तलाश इंटरपोल भी कर रहा है। एनआईए के लिए इन आतंकियों की तलाश एक चुनौती बन गई है। जांच एजेंसी अब अपने मुखबिरों की मदद से इन आतंकियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, लेकिन सफलता का ग्राफ अभी बहुत नीचे है।
मोस्ट वांटेड आतंकियों में कई ऐसे भी हैं, जिनके पीछे पांच-छह साल से जांच एजेंसी लगी है, मगर इनका कोई सुराग नहीं लग सका। पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का फोटो तो है, लेकिन उसके गुर्गों की तस्वीर नहीं है। इसी तरह हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सईद सलाउदीन की तस्वीर एजेंसी के पास है, मगर इस आतंकी संगठन के दूसरे सदस्यों का केवल नाम है। लश्कर-ए-तैयबा के हाफिज सईद को लेकर भी यही स्थिति है। जांच एजेंसी ने लंबे समय से इन तीनों संगठनों के प्रमुखों को मोस्ट वांटेड घोषित कर रखा है। ये आतंकी मीडिया में दिखते रहते हैं। एनआईए को पता है कि ये पाकिस्तान में कहां पर हैं। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक एनआईए आगे बढ़ रही है।
दिक्कत ये है कि इनके गुर्गे जो कश्मीर में छिपे हैं, उनके बारे में एजेंसी के पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। केवल इतनी जानकारी है कि इन आतंकियों ने कहां और कब, किस आतंकी घटना को अंजाम दिया है। एजेंसी के पास इनका फोटो भी नहीं है, जिससे इन्हें पकड़ने में सफलता मिल सके; जैसे:
-जांच एजेंसी को हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी अब्दुल मजीद सोफी की 2011 से तलाश है। इसका नाम इंटरपोल की मोस्ट वांटेड सूची में भी शामिल है। इसका फोटो न एनआईए के पास है और न ही इंटरपोल को इस बाबत कोई जानकारी है।
-मणिपुर के हांगशी रैमसन तंगशूल की भी इंटरपोल और एनआईए, दोनों को तलाश है, मगर कोई इनका चेहरा ही नहीं जानता
-मोहम्मद हुसैन फरहान, सदब अहमद, वली, हरमीत सिंह, हिलाल अहमद राथेर, गुरजंत सिंह, गुरशरन बीर सिंह, गुरजिंद्र सिंह, अब्दुल्ला रसीद, बीरबल गंजू, मंजूर अहमद डार, गुलाम नबी खान, मो. अनवर हुसैन, अबू रसीद, मो. सलीम इशाफी और अब्दुल खादिर सुल्तान अर्मर का भी फोटो न होने के कारण इंटरपोल और एनआईए के लिए इनकी तलाश मुश्किल हो गई है।
-शाह रियाज अहमद, मो. युसूफ शाह, मोहसीन चौधरी, मुबारक शाह, नाजिर अहमद डार, मिर्जा शहब बेग, इकबाल भटकल, मो. खालिद और एमडी साजिद की तलाश में इंटरपोल व एनआईए कई सालों से जुटी हैं, लेकिन इनकी तस्वीर भी आज तक नहीं जुटाई सकी।
एनआईए के मोस्ट वांटेड, जिनका नाम है, पर चेहरा नहीं...
-जुनैद अकरम मलिक, तेलम आयतू, सनु वेटी, मोदीयाम रमेश, उमर फारुख शेरा, डॉ. शाहनवाज आलम, टीआर केलविन, मंगली कोसा, मो. नावेद जट, प्रशांत बोस, गौरव मुंडा और लक्ष्मण कोराम सहित कई ऐसे आतंकी हैं, जिनका फोटो न होने की वजह से वे आज तक एजेंसी के हाथ नहीं लग सके हैं।इस सूची में कई दूसरे आतंकियों के नाम भी शामिल हैं।
मुखबिरों से मदद लेने के लिए कई आतंकियों पर ईनाम भी रखा गया है...
चूंकि अब इन आतंकियों की तलाश इतनी आसान नहीं है, इसलिए जांच एजेंसी ने सभी राज्यों की पुलिस के साथ आतंकियों की जानकारी तो सांझा की है, लेकिन वहां भी वही दिक्कत पेश आ रही है। तस्वीर न होने की वजह से राज्यों की पुलिस भी त्वरित कार्रवाई करने में खुद को असहाय महसूस करती है। यही वजह है कि एनआईए ने कई आतंकियों, जिनका नाम तो है, लेकिन फोटो नहीं है, इन पर ईनाम घोषित कर दिया गया है। ईनामी राशि भी एक लाख रुपये से लेकर दस लाख रुपये तक है। विशेष परिस्थितियों में इस राशि को बढ़ाया भी जा सकता है। जांच एजेंसी का प्रयास है कि यह ईनामी राशि मुखबिरों को सूचना जुटाने के लिए प्रोत्साहित करती है। मुखबिरों के अलावा अन्य कोई ऐसा रास्ता नहीं है, जिससे सुरक्षा बल या जांच एजेंसी इन आतंकियों तक पहुंच सके। राज्यों की पुलिस के मुखबिरों को भी इसके लिए विशेष राशि देने की बात कही गई है।