भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में कथित नक्सली लिंक वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गंभीर सवाल खड़ा किया है। मीडिया रिपोर्ट पर स्वत संज्ञान लेते हुए एनएचआरसी ने महाराष्ट्र पुलिस से पूछा है कि इन गिरफ्तारियों में तय मानकों का पालन किया गया है कि नहीं। आयोग ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए चार हफ्ते केभीतर कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया का ब्यौरा देने को कहा है।
एनएचआरसी ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से कहा है कि ऐसा लगता है कि इन पांच कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के मामले में मानक संचालक प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं हुआ है। अगर ऐसा हुआ है तो यह कार्यकर्ताओं के मानवाधिकार का हनन है। उधर महाराष्ट्र पुलिस ने केंद्रीय गृहमंत्रालय को सौंपी गई शुरुआती रिपोर्ट में कहा है कि सभी गिरफ्तार कार्यकर्ता उन संस्थाओं से जुड़े हैं जिनका नाता नक्सलियों से है। हालांकि गृहमंत्रालय ने इस मामले में औपचारिक तौर पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है।
गिरफ्तारी के सवाल पर मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि यह पूरा मामला महाराष्ट्र पुलिस के जुड़ा है। हालांकि अधिकारी ने साफ किया कि जबतक यह लोग माओवाद या दूसरे विचारधारा से विचार के नाम पर जुड़े हैं कोई अपराध नहीं। लेकिन जैसे ही वह धन या अन्य संसाधनों से नक्सलियों की मदद करते हैं वह अपराधी की श्रेणी में आ जाते हैं। अधिकारी केमुताबिक कोबाद गांधी और जीएन साईबाबा जैसे मानवाधिकार कार्यकर्ता पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं।