रिहायशी इलाकों में लगे मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन से मानव जीवन को खतरे संबंधी एक शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। दोनों मंत्रालयों को दो हफ्ते के भीतर इस संबंध में जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। मंत्रालयों को नोटिस जारी करते हुए आयोग ने गौर किया कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आज लोग मोबाइल, मोबाइल टॉवर, डिजिटल केबल आदि के बीच रह रहे हैं।
वर्चुव्ल आज मानव जीवन के हर पहलू में शामिल हो गया है। आयोग ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप अगर सही हैं तो यह स्वास्थ्य के अधिकार और जीने के अधिकार के उल्लंघन से जुड़ा मामला है क्योंकि इससे मानव जीवन को क्षति पहुंचने की आशंका है। आयोग ने कहा कि सरकार को ऐसी योजनाएं अपनानी चाहिए जिसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए विकास का काम लोगों के जीवन और उसके स्वास्थ्य को बगैर नुकसान पहुंचाए हो। आयोग के समक्ष दाखिल शिकायत में रेडिएशन के कारण होने वाले नुकसान का ब्योरा दिया गया है।
साथ ही इससे संबंधित वैज्ञानिक अध्यन आदि भी दिए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि वैसे तो रेडिएशन से सभी लोगों को नुकसान पहुंचने का खतरा है लेकिन बच्चे, बुजुर्ग और मरीज आदि अधिक प्रभावित होंगे। शिकायत में वर्ष 2013 में सरकार द्वारा लिए गए उस निर्णय को अनुपयोगी बताया गया है जिसमें स्कूल या अस्पतालों के 500 मीटर के दायरे में मोबाइल टावर न होने की बात कही गई थी।
शिकायत में कहा गया है कि इसके दायरे में घरों को भी रखा जाना चाहिए। ऐसा न होने के कारण ही लोगों के खतरों को नजरअंदाज कर घनी आबादी वाले इलाकों में मोबाइल टॉवर लगाए जा रहे हैं। इसके एवज में घर के मालिकों को मोटी रकम दी जाती है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि रेडिएशन रेंज के उल्लंघन पर 31 मई 2015 तक मोबाइल सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों से 10.80 करोड़ रुपये जुर्माना वसूल किया गया है। यह प्रमाण है कि किस तरह से रेडिएशन रेंज का उल्लंघन होता रहता है।